Bihar news: ​पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष शांतनु शेखर ने राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि छात्रों के हक की आवाज उठाने की सजा उन्हें जेल जाकर भुगतनी पड़ी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन और अपनी विपक्षी राजनीतिक विचारधारा के कारण की गई कार्रवाई करार दिया है।

​146 करोड़ के उद्घाटन में सवाल उठाने पर विवाद

​मामले की शुरुआत 28 मार्च को पटना विश्वविद्यालय में 146 करोड़ रुपये की लागत से बने नए भवन के उद्घाटन समारोह से हुई। शांतनु का आरोप है कि इस भव्य आयोजन से छात्रों को पूरी तरह दूर रखा गया और उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। जब वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और उपमुख्यमंत्री से इस पर सवाल पूछा, तो सरकारी तंत्र और प्रशासन को यह रास नहीं आया। शांतनु के अनुसार, एक निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर पारदर्शिता की मांग करना उनका अधिकार था, लेकिन इसके बदले में उन्हें निशाना बनाया गया।

​गंभीर धाराओं में मुकदमा और जेल की कार्रवाई

​सवाल पूछने के बाद शांतनु के खिलाफ धारा 121 और 276 जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके घर पर लगातार दबिश दी मानो वे कोई बड़े अपराधी हों। शांतनु ने सवाल उठाया कि यदि एक निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि को अपनी बात रखने की आजादी नहीं है तो आम छात्र अपनी समस्याएं कैसे रखेंगे? उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका एकमात्र अपराध छात्रों के अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग करना था।

​विपक्षी विचारधारा के कारण निशाना बनाया गया

​शांतनु शेखर जो कांग्रेस समर्थित छात्र राजनीति से जुड़े हैं, का दावा है कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े उम्मीदवारों को चुनाव में हराना ही उनकी प्रताड़ना का मुख्य कारण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन उन्हें एक प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार करने में विफल रहे हैं। निचली अदालत से राहत न मिलने के बाद अब उन्हें पटना उच्च न्यायालय से राहत मिली है। उन्होंने न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

​डरने वाले नहीं संघर्ष जारी रहेगा

​अपने भविष्य के रुख पर शांतनु ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी दबाव या मुकदमे से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा चाहे मुझे जेल भेजें या कोई भी सजा दें मैं छात्रों की आवाज उठाना बंद नहीं करूंगा। उन्होंने वादा किया कि वे कॉलेजों में संसाधनों की कमी, पुस्तकालयों में एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं और छात्रों के हितों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति का उद्देश्य दलगत राजनीति नहीं बल्कि छात्रों की समस्याओं का समाधान करना है और वे हर विचारधारा के छात्र के लिए बिना किसी भेदभाव के काम करते रहेंगे।