हेमंत शर्मा, इंदौर। राहुल गांधी के 12 सितंबर को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर इंदौर में सियासी पारा चढ़ गया है। कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम की अनुमति को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच अब सीधे पत्रों के जरिए राजनीतिक वार-पलटवार शुरू हो गया है। बीजेपी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र लिखकर कार्यक्रम स्थल को लेकर सवाल खड़े किए और वैकल्पिक स्थान सुझाए। इसके जवाब में कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े ने सुमित मिश्रा को पत्र लिखकर बीजेपी की चिंता और भाषा पर ही सवाल खड़े कर दिए।

बीजेपी की चिट्ठी- ‘जगह तलाशने में आपकी और पूरी टीम की नींद उड़ गई’

सुमित मिश्रा ने 1 सितंबर को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नाम पत्र लिखा। पत्र की शुरुआत में उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नाम पर कार्यक्रम के लिए जगह ढूंढने में जीतू पटवारी और उनकी पूरी टीम की नींद उड़ गई है। मिश्रा ने लिखा कि इंदौर की सौहार्दपूर्ण राजनीतिक परंपरा और सौजन्यता के नाते वह यह पत्र लिख रहे हैं। इसके बाद बीजेपी नगर अध्यक्ष ने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के चुनाव का हवाला देते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने लिखा कि चुनाव में ‘देनप’ को तीसरे नंबर पर लुढ़का कर ‘जैन जी’ ने राहुल गांधी को संदेश दे दिया है। इसके बाद हजार-बारह सौ लोगों के साथ संवाद और भोजन के लिए परेशानी होना लाजिमी है।

अभय प्रशाल से लेकर सुपर कॉरिडोर तक… BJP ने गिनाए विकल्प

सुमित मिश्रा ने पत्र में कांग्रेस को कार्यक्रम के लिए कई विकल्प भी सुझाए।उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस आयोजन स्थल के नाम पर भ्रम फैला रही है और विकल्प के रूप में अपने अभय प्रशाल सभागृह का उपयोग कर सकती है।मिश्रा ने 2003 में सोनिया गांधी के अभय प्रशाल में कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस दो-तीन हजार युवाओं को इकट्ठा कर सके तो दशहरा मैदान भी अच्छा विकल्प है।वहीं, कांग्रेस की ओर से 50 हजार विद्यार्थियों से संवाद किए जाने के दावे पर सुमित मिश्रा ने सुपर कॉरिडोर को बेहतर विकल्प बताया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि वहां संवाद के अलावा भोजन और पार्किंग की व्यवस्था भी हो सकती है।

BJP का राहुल गांधी पर सीधा हमला

बीजेपी नगर अध्यक्ष ने पत्र को सिर्फ कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि राहुल गांधी पर भी सीधा राजनीतिक हमला किया।उन्होंने लिखा कि सनातन हिंदू धर्म, भारत और वंदे मातरम के विरोध में खड़े होने वाले राहुल गांधी को इंदौर के कितने युवाओं का समर्थन मिलेगा, यह इंदौर की जनता जानती है।सुमित मिश्रा ने कहा कि उन्होंने सिर्फ सौजन्यता के नाते सुझाव दिए हैं और उम्मीद जताई कि कांग्रेस उनके सुझाव को गंभीरता से लेगी तथा मां अहिल्या की नगरी को लेकर दुष्प्रचार नहीं करेगी।पत्र के आखिर में उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए लिखा कि गांधीजी की कांग्रेस को विसर्जित कर देने की अंतिम इच्छा को पूर्ण करने में लगे युवराज राहुल गांधी अपने प्रयास जारी रखें।

कांग्रेस का पलटवार- ‘कार्यक्रम की सफलता से पहले ही आपकी चिंता बढ़ गई’

बीजेपी की चिट्ठी के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष और पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े ने सुमित मिश्रा को जवाबी पत्र लिखा।वानखेड़े ने अपने पत्र में कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को लिखे पत्र से स्पष्ट होता है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 12 सितंबर के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की सफलता से पहले ही बीजेपी नगर अध्यक्ष की चिंता बढ़ गई है।कांग्रेस नेता ने बीजेपी नगर अध्यक्ष की भाषा और सोच पर भी निशाना साधा।उन्होंने लिखा कि यह बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि इंदौर जैसे प्रतिष्ठित शहर को ऐसी निम्न भाषा और विचार रखने वाला सत्तारूढ़ पार्टी का अध्यक्ष मिला है।

‘50 हजार युवाओं की भागीदारी से भय बैठ चुका है’

विपिन वानखेड़े ने बीजेपी के पत्र में 50 हजार युवाओं की व्यवस्था को लेकर जताई गई चिंता पर पलटवार करते हुए लिखा कि जिस तरह की चिंता व्यक्त की गई है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि इंदौर के विद्यार्थियों और युवाओं की बढ़ती भागीदारी से भय बैठ चुका है।कांग्रेस ने साफ किया कि यह कार्यक्रम सिर्फ किसी राजनीतिक सभा के लिए नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं की समस्याओं पर संवाद के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।वानखेड़े ने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसकी सरकार लगातार छात्रों की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है।

कांग्रेस ने पुराने आयोजनों का दिया हिसाब, पूछा- फिर नेहरू स्टेडियम से आपत्ति क्यों?

बीजेपी के वैकल्पिक स्थानों के सुझाव के जवाब में विपिन वानखेड़े ने नेहरू स्टेडियम में पहले हो चुके बड़े आयोजनों का पूरा ब्यौरा पत्र में रखा।

कांग्रेस के पत्र के मुताबिक 

1. स्वच्छता कॉन्सर्ट (शान लाइव), 23 दिसंबर 2017
आयोजकों के अनुसार करीब 40 से 45 हजार लोगों की उपस्थिति रही।

2. बलिदान दिवस समारोह, 4 दिसंबर 2021
आयोजकों के अनुसार करीब 50 से 60 हजार लोगों की उपस्थिति रही।

3. शौर्य कुंभ, 5 अप्रैल 2025
आयोजकों के अनुसार करीब 61 हजार युवाओं ने सहभागिता की।

4. नगर स्थापना वर्षगांठ, 1 जून 2025
आयोजकों के अनुसार करीब 40 से 45 हजार नागरिकों की उपस्थिति रही।

कांग्रेस ने इन उदाहरणों के जरिए बीजेपी से सवाल किया कि जब नेहरू स्टेडियम में पहले हजारों लोगों की मौजूदगी वाले कार्यक्रम हो चुके हैं, तो राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए स्टेडियम की अनुमति को लेकर इतनी आपत्ति क्यों?

छोटी मानसिकता छोड़िए, नेहरू स्टेडियम की परमिशन दिलाने में सहयोग कीजिए

वानखेड़े ने अपने जवाबी पत्र के आखिर में सुमित मिश्रा से कहा कि वे अपनी छोटी मानसिकता का त्याग करें और नेहरू स्टेडियम की परमिशन दिलवाने में सहयोग करें।उन्होंने बीजेपी नगर अध्यक्ष से यह भी अनुरोध किया कि सरकार को युवाओं के प्रति न्यायपूर्ण नीतियां बनाने के लिए कहें और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का दिल खोलकर स्वागत करें।

परमिशन से शुरू विवाद अब ‘भीड़ बनाम प्रभाव’ की लड़ाई

राहुल गांधी के कार्यक्रम की अनुमति का मामला अब महज प्रशासनिक अनुमति का मुद्दा नहीं रह गया है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच शुरू हुआ पत्राचार सीधे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदलता नजर आ रहा है।बीजेपी जहां कांग्रेस के 50 हजार युवाओं की भागीदारी के दावे पर सवाल उठा रही है और कार्यक्रम के लिए अभय प्रशाल, दशहरा मैदान और सुपर कॉरिडोर जैसे विकल्प सुझा रही है, वहीं कांग्रेस पुराने आयोजनों की भीड़ का हवाला देकर पूछ रही है कि जब इतने बड़े कार्यक्रम नेहरू स्टेडियम में हो चुके हैं तो राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर आपत्ति क्यों?सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों दल अब एक-दूसरे की राजनीतिक ताकत को युवाओं के बीच परखने की चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं।

बीजेपी का तंज है कि राहुल गांधी को इंदौर के युवाओं का कितना समर्थन मिलेगा, जबकि कांग्रेस का दावा है कि 12 सितंबर को युवाओं की मौजूदगी ही बीजेपी की ‘चिंता’ का जवाब देगी।यानी नेहरू स्टेडियम की परमिशन अब सिर्फ मैदान की अनुमति का सवाल नहीं रही, बल्कि इंदौर में राहुल गांधी की संभावित सभा और युवाओं के बीच कांग्रेस की ताकत के प्रदर्शन का राजनीतिक मुद्दा बन गई है।

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