चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव की संभावनाएं तेज हो गई हैं। पार्टी हाईकमान द्वारा नियुक्त तीन पर्यवेक्षकों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कांग्रेस नेतृत्व को सौंप दी है, जिसके बाद प्रदेश संगठन में फेरबदल को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की मौजूदगी में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर चर्चा हुई। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन ने रिपोर्ट का प्रस्तुतिकरण किया।

जानकारी के मुताबिक रिपोर्ट तैयार करने से पहले पर्यवेक्षकों ने पंजाब के कांग्रेस विधायकों, सांसदों, जिला कांग्रेस अध्यक्षों और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्यों समेत करीब 72 नेताओं से विस्तार से बातचीत की। नेताओं से संगठन की स्थिति, आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और नेतृत्व को लेकर राय ली गई।

अध्यक्ष पद को लेकर मांगी गई राय

सूत्र बताते हैं कि नेताओं से यह भी पूछा गया कि क्या प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बदलाव की आवश्यकता है। साथ ही यह जानने का प्रयास किया गया कि कौन सा नेता पार्टी को चुनावी जीत दिलाने की क्षमता रखता है, कौन सभी गुटों को साथ लेकर चल सकता है और किस नेतृत्व में पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

इसके अलावा संगठन को मजबूत बनाने, चुनावी रणनीति तैयार करने और प्रमुख पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी सुझाव जुटाए गए। सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों, विशेष रूप से सिख, जाट, हिंदू और दलित समुदायों के प्रतिनिधित्व पर भी चर्चा की गई।

इन नेताओं के नाम सबसे आगे

सूत्रों के अनुसार पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और विजय इंदर सिंघला के नामों का सुझाव दिया है। अब अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है। माना जा रहा है कि निर्णय के बाद पंजाब कांग्रेस में व्यापक संगठनात्मक बदलावों की घोषणा की जा सकती है।