रविंद्र कुमार, रायबरेली. भारतीय जनता पार्टी में सामान्य कार्यकर्ता को संगठन के शीर्ष पदों तक पहुंचने का मौका मिलने की बात कही जाती है, लेकिन रायबरेली जिले में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की चर्चा तेज हो गई है. सोशल मीडिया पर चल रही बहस में कई कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि क्या जिले की कमान हमेशा कुछ चुनिंदा चेहरों तक ही सीमित रहेगी.
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कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा उस समय सामने आई है, जब जिले में संगठन के पदों और जिम्मेदारियों को लेकर मंथन चल रहा है. कुछ कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पिछले कई वर्षों में संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर बार-बार वही लोग नजर आते रहे हैं. उनका कहना है कि जिम्मेदारियां बदलीं, लेकिन चेहरे नहीं बदले.
पुराने चेहरों को बार-बार मौका मिलने का आरोप
कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के लिए बूथ स्तर से लेकर मंडल स्तर तक लगातार मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को जिला संगठन में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है. उनका आरोप है कि कई ऐसे कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के कार्यक्रमों, अभियानों और चुनावी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन जब बड़े संगठनात्मक पदों की बारी आती है तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल
रायबरेली भाजपा में संगठन को लेकर सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं के बीच बहस देखने को मिल रही है. कई कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या पार्टी में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ सक्रियता और मेहनत ही पर्याप्त है या फिर किसी खास गुट से जुड़ाव भी जरूरी हो गया है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए जमीनी कार्यकर्ताओं को भी नेतृत्व में जगह मिलनी चाहिए. उनका मानना है कि नए चेहरों को मौका मिलने से संगठन में ऊर्जा और मजबूती आएगी.
‘क्या कार्यकर्ता सिर्फ दरी बिछाने के लिए हैं?’
सोशल मीडिया पर कुछ कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या बूथ और मंडल स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ता सिर्फ कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने और व्यवस्था संभालने तक सीमित रह जाएंगे. उनका कहना है कि पार्टी के लिए वर्षों तक काम करने वाले कार्यकर्ताओं को भी जिला स्तर की जिम्मेदारियों में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को प्राथमिकता देने की मांग उठाई जा रही है.
संगठन की मजबूती के लिए नए चेहरों की मांग
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि लगातार पुराने चेहरों को ही जिम्मेदारियां मिलती रहेंगी तो नए और मेहनती कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है. उनका मानना है कि संगठन में पद देने के दौरान सक्रियता, क्षमता, जनसंपर्क और जमीनी पकड़ को आधार बनाया जाना चाहिए. आने वाले चुनावों को देखते हुए कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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रायबरेली जैसे राजनीतिक रूप से अहम जिले में संगठनात्मक संतुलन और कार्यकर्ताओं की भागीदारी का मुद्दा अब चर्चा का विषय बन गया है. आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस पर क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी.


