वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। हिंदी सिनेमा और वेब सीरीज ‘पंचायत’ में ‘प्रधान जी’ के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता रघुवीर यादव शनिवार को बिलासपुर पहुंचे। यहां वे अपने चर्चित नाटक ‘पियानो’ के मंचन में शामिल होंगे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से विस्तृत बातचीत में अपने लंबे अभिनय सफर, रंगमंच के अनुभवों और जीवन-दर्शन को लेकर कई महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक बातें साझा कीं।

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थिएटर को बताया जीवन जीने की कला की सबसे बड़ी पाठशाला

रघुवीर यादव ने कहा कि थिएटर केवल अभिनय का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन जीने की सबसे बड़ी पाठशाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर स्कूल, कॉलेज और गांव में थिएटर की शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को थिएटर से जोड़ना बेहद जरूरी है क्योंकि यह न केवल अभिनय सिखाता है, बल्कि व्यक्ति को अनुशासन, तहजीब और आत्म-विश्लेषण भी सिखाता है।

उन्होंने कहा, “थिएटर इंसान को खुद को पहचानने का मौका देता है और उसके भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाता है। थिएटर से जुड़कर व्यक्ति जीने का सलीका सीखता है।”

‘थिएटर में तैरना नहीं, डूबना सीखा है’

बिलासपुर के अग्रज नाट्य दल के चार दिवसीय कार्यक्रम में शामिल हुए रघुवीर यादव ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन में रंगमंच से गहराई से सीख ली है। उन्होंने कहा, “मैंने थिएटर में तैरना नहीं, डूबना सीखा है।”

उन्होंने आगे कहा कि थिएटर व्यक्ति को सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि जीवन के हर छोटे-बड़े पहलू—जैसे रसोई में खाना बनाना, व्यवहार, संवाद और संवेदनशीलता सब कुछ सिखाता है।

संगीत और कला को बताया तनाव मुक्ति का साधन

संगीत को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि संगीत जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह न केवल तनाव को कम करता है, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाए रखने में भी मदद करता है। उन्होंने कहा कि कला के हर रूप चाहे वह संगीत हो या रंगमंच मानसिक शांति और आत्मिक विकास में सहायक होते हैं।

1967 से रंगमंच से जुड़ा लंबा सफर

रघुवीर यादव ने बताया कि वे 1967 से लगातार रंगमंच से जुड़े हुए हैं। इतने वर्षों बाद भी वे खुद को एक सीखने वाला कलाकार मानते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी लगता है कि बहुत कुछ सीखना बाकी है और अभिनय की यह यात्रा कभी खत्म नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने काम को संघर्ष नहीं बल्कि एक निरंतर सीखने की प्रक्रिया मानते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हर कलाकार के लिए थिएटर में प्रशिक्षण बेहद जरूरी है, क्योंकि बिना प्रशिक्षण के कोई भी कलाकार लंबे समय तक मंच पर टिक नहीं सकता।

हबीब तनवीर और सत्यदेव दुबे को किया याद

बातचीत के दौरान उन्होंने प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर और सत्यदेव दुबे को भावपूर्ण तरीके से याद किया। उन्होंने कहा कि हबीब तनवीर ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति ‘नाचा-गम्मत’ को दुनिया तक पहुंचाने और संरक्षित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

रघुवीर यादव ने कहा कि हमारी लोक संस्कृति, लोकगीत और परंपराएं हमारी असली पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी जड़ों को भूल जाएंगे तो हमारी पहचान कमजोर हो जाएगी, इसलिए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ना चाहिए।

फिल्मों और वेब सीरीज पर भी दी राय

रघुवीर यादव ने कहा कि फिल्मों और वेब सीरीज का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए इन माध्यमों का उपयोग सकारात्मक संदेश देने के लिए होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अच्छी कहानियां समाज को दिशा देती हैं और कलाकारों की जिम्मेदारी है कि वे अपने काम के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाएं।

योगेश स्मृति नाटक दल में प्रस्तुति

रघुवीर यादव बिलासपुर में आयोजित चार दिवसीय योगेश स्मृति नाटक दल कार्यक्रम में भी अपनी विशेष प्रस्तुति देंगे। उनके आगमन से शहर के रंगमंच प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

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