Rajasthan News: डीग में साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ा एक्शन लिया है। डीएसटी टीम ने ऑपरेशन एंटीवायरस चलाकर 3 शातिर ठगों को रंगे हाथों दबोच लिया। इलाके में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। ये ठग लोगों की मजबूरी और लालच का फायदा उठाते थे। इनके झांसे में कई लोग आ चुके हैं।

ऐसे फंसाते थे जाल में

पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन बदमाशों के ठगी करने के दो मुख्य पैंतरे थे। पहला तरीका बेहद शातिर था। ये लोग सोशल मीडिया पर सस्ते दामों में सूट और साड़ी बेचने के लुभावने वीडियो डालते थे। जैसे ही कोई ग्राहक झांसे में आकर ऑर्डर देता, ये एडवांस पेमेंट जमा करवा लेते थे। पैसा मिलते ही आरोपी अपना मोबाइल नंबर बंद कर देते थे।

रिश्तेदार बनकर एक्सीडेंट का झूठ

इनका दूसरा तरीका भावनाओं से खिलवाड़ करने का था। आरोपी सीधे लोगों को फोन करते और खुद को उनका करीबी रिश्तेदार या पुराना परिचित बताते थे। इसके बाद वे कहते, मेरा एक्सीडेंट हो गया है” या “मैं अस्पताल में भर्ती हूं, तुरंत मदद चाहिए। सामने वाला शख्स हड़बड़ी में बिना जांचे-परखे इमरजेंसी समझकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर देता था।

मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी

पुलिस को काफी दिनों से इन ठगों की तलाश थी। सटीक लोकेशन मिलते ही पुलिस की टीम ने जाल बिछाया। पुलिस ने मौके से करतार पुत्र ओमवीर सिंह (26), शांतनु (30) और राजेन्द्र (38) को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए बदमाशों के पास से ठगी का सामान भी मिला है। आरोपियों से पुलिस ने 4 चालू मोबाइल फोन, 8 फर्जी एक्टिवेटेड सिम कार्ड, 5 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड, 25 हजार रुपये नगद कैश बरामद किया है।

एसपी की जनता से जरूरी अपील

डीग एसपी शरण कांबले ने इस कार्रवाई के बाद आम लोगों के लिए एक जरूरी अलर्ट जारी किया है। उन्होंने साफ कहा है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले बहुत सस्ते सामान के लालच में बिल्कुल न आएं। किसी भी अनजान लिंक को क्लिक न करें। अगर कोई फोन पर रिश्तेदार बनकर अस्पताल या एक्सीडेंट के नाम पर तुरंत पैसे मांगे, तो सबसे पहले अपने स्तर पर फोन करके उसकी सच्चाई जरूर पता करें। फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और कई बड़े खुलासों की उम्मीद है।

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