Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैफे और अन्य आतिथ्य कारोबार के लाइसेंस शुल्क में संशोधन करते हुए छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। मई में शुल्क बढ़ाने के फैसले का विरोध होने के बाद स्वायत्त शासन विभाग ने नई शुल्क संरचना लागू कर दी है। हालांकि सरकार ने यह भी तय किया है कि लाइसेंस शुल्क में हर साल स्वतः 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।

नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा छोटे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को मिलेगा। पहले 50 कमरों तक के सभी होटलों को एक ही श्रेणी में रखा गया था, जिससे 10 से 15 कमरों वाले छोटे होटल भी 25 हजार रुपये सालाना शुल्क देने के लिए बाध्य थे। अब सरकार ने कमरों की संख्या के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां बनाकर शुल्क कम कर दिया है।
10 कमरों तक के होटल को सबसे ज्यादा राहत
संशोधित आदेश के अनुसार, 10 कमरों तक के होटल का वार्षिक लाइसेंस शुल्क 25 हजार रुपये से घटाकर 7,500 रुपये कर दिया गया है। यानी ऐसे होटल संचालकों को सीधे 17,500 रुपये की राहत मिलेगी। वहीं 25 कमरों तक के होटल के लिए शुल्क 10 हजार रुपये और 26 से 50 कमरों तक के होटल के लिए 20 हजार रुपये तय किया गया है।
रेस्टोरेंट और ढाबों को भी राहत दी गई है। 50 सीट तक के नॉन-एसी रेस्टोरेंट और ढाबों का शुल्क घटाकर 5 हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि 50 सीट तक के एसी रेस्टोरेंट का लाइसेंस शुल्क 20 हजार रुपये से घटाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया है।
हालांकि कैफे, बेकरी, मिठाई की दुकान, क्लाउड किचन, जिम, स्विमिंग पूल, बड़े होटल, हैरिटेज होटल और 50 से अधिक कमरों वाले होटलों की शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
विरोध के बाद बदला फैसला
24 मई को जारी आदेश में कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों की लाइसेंस फीस में भारी बढ़ोतरी की गई थी। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने इसका विरोध करते हुए सरकार से शुल्क कम करने की मांग की थी। इसके बाद विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा कर नई शुल्क संरचना लागू की।
हर साल 5% बढ़ेगी फीस
सरकार ने लाइसेंस शुल्क में राहत तो दी है, लेकिन हर वर्ष 5 प्रतिशत की स्वतः वृद्धि का प्रावधान भी रखा है। इससे कारोबारियों को फिलहाल राहत मिलेगी, लेकिन आने वाले वर्षों में लाइसेंस शुल्क धीरे-धीरे बढ़ता रहेगा।
आवासीय क्षेत्रों में नियम और सख्त
नई व्यवस्था के तहत मास्टर प्लान या जोनल डेवलपमेंट प्लान के विपरीत आवासीय भवनों में शुरू होने वाली नई व्यावसायिक गतिविधियों को लाइसेंस नहीं मिलेगा। केवल 31 जनवरी 2017 से पहले जारी लाइसेंसों का ही नवीनीकरण किया जाएगा। बिना लाइसेंस कारोबार संचालित करने पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
व्यापारियों की क्या है मांग?
होटल एसोसिएशन उदयपुर के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल का कहना है कि 50 से अधिक कमरों वाले होटलों को भी शुल्क में राहत मिलनी चाहिए। साथ ही नगर निगम को पुरानी दरों पर लंबित नवीनीकरण मामलों का जल्द निस्तारण करना चाहिए और हर साल 5 प्रतिशत शुल्क वृद्धि का प्रावधान वापस लेना चाहिए।
वहीं होटल एसोसिएशन उदयपुर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव कोठारी ने 20 कमरों की सीमा बढ़ाकर 25 कमरे करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि होटल परिसर में संचालित रेस्टोरेंट का शुल्क होटल लाइसेंस में ही शामिल किया जाए और अलग शुल्क केवल स्टैंडअलोन रेस्टोरेंट पर लागू हो।
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