Rajasthan News: झालावाड़ के पीपलोदी सरकारी स्कूल हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। हादसे के बाद स्कूल के जर्जर भवनों की हालत खुलकर सामने आई, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर संकट मंडराने लगा। ऐसे में गांव के गरीब लेकिन बड़े दिल वाले मोर सिंह आगे आए और मिसाल कायम कर दी। उन्होंने अपना पक्का मकान स्कूल को अस्थायी रूप से दे दिया और खुद परिवार के साथ लकड़ी और तिरपाल से बनी एक झोपड़ी में रहने लगे।

मोर सिंह खुद निरक्षर हैं, लेकिन शिक्षा के महत्व को गहराई से समझते हैं। उनका कहना है कि गांव में पढ़े-लिखे लोग बेहद कम हैं, और वे नहीं चाहते कि हादसे के बाद बच्चों की पढ़ाई ठप हो जाए। जब तक प्रशासन नया स्कूल भवन नहीं बना लेता, तब तक उनका मकान ही कक्षाओं के लिए इस्तेमाल होगा। मोर सिंह ने कहा, हमारी तकलीफ कुछ महीनों की है, लेकिन बच्चों का भविष्य पूरा जीवन का सवाल है।
परिवार के 10 सदस्यों में शुरुआत में इस फैसले का विरोध हुआ, क्योंकि सभी के लिए झोपड़ी में रहना मुश्किल था। लेकिन मोर सिंह ने धैर्य और समझाइश से सभी को राजी कर लिया। अब पूरा परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए खुशी-खुशी इस कठिनाई को झेल रहा है।
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