Rajasthan News: कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए एक नई पहल शुरू की जा रही है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर यहां जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम लागू होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या को न्यूनतम स्तर तक लाना है।

इस संबंध में संसद भवन में सेव लाइफ फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई, जिसमें सड़क सुरक्षा को केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा अभियान बनाने पर जोर दिया गया।
सेव लाइफ फाउंडेशन की हालिया अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, कोटा-बूंदी क्षेत्र में हर वर्ष औसतन 400 से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है। रिपोर्ट में ऐसे 21 कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं, जहां क्षेत्र की लगभग आधी दुर्घटनाएं होती हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि 19 स्थानों पर यातायात नियमों की अनदेखी दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन रही है, जबकि 12 संवेदनशील जगहों पर पैदल चलने वालों की मौत के मामले अधिक दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र के 60 थाना क्षेत्रों में से केवल 25 थाना क्षेत्र ऐसे हैं, जहां सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली 80 प्रतिशत मौतें दर्ज होती हैं। तेज रफ्तार और गलत तरीके से ओवरटेकिंग को सबसे बड़ी वजह माना गया है।
कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग और पुलिस मिलकर काम करेंगे। दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट का तकनीकी ऑडिट कराया जाएगा और वहां जरूरी इंजीनियरिंग सुधार किए जाएंगे।
सड़क किनारे स्थित स्कूलों के आसपास भी सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाएंगे ताकि बच्चों की आवाजाही सुरक्षित हो सके। इसके अलावा दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे यानी गोल्डन ऑवर में बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए एम्बुलेंस नेटवर्क को मजबूत करने की योजना है।
कोटा में संचालित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सड़क सुरक्षा निगरानी के लिए और अधिक सक्रिय बनाया जाएगा। ओम बिरला ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम अपनाने का सुझाव दिया है, जिससे राजमार्गों और संवेदनशील मार्गों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा सके।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है। नियमों का पालन, सतर्क ड्राइविंग और जनजागरूकता के बिना दुर्घटनाओं में कमी लाना संभव नहीं होगा। इसी सोच के साथ इस पहल को जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी की जा रही है, ताकि सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोका जा सके और अधिक से अधिक जिंदगियां बचाई जा सकें।
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