करौली। राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते को लेकर जारी चर्चाओं के बीच राजस्थान में एक और अहम जल विवाद का समाधान हो गया है। करौली जिले के करीब 20 साल पुराने पांचना बांध विवाद पर सरकार और किसानों के बीच देर रात सहमति बन गई, जिसके बाद इसे एक ऐतिहासिक ‘जलसंधि’ माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब 12 बजे सवाई माधोपुर के खंडीप गांव में चल रही मैराथन बैठकों के बाद सरकार, प्रशासन और किसान संगठनों के बीच अंतिम समझौता हुआ। इस सहमति के तहत आगामी सात दिनों के भीतर बांध से पानी छोड़ने की तारीख का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।
पांचना बांध से कमांड एरिया (बयाना, रूपवास और भरतपुर क्षेत्र) के गांवों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से किसान आंदोलन चल रहा था। विवाद को सुलझाने के लिए जयपुर और करौली स्तर पर कई दौर की वार्ताएं हुईं।
सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार शाम शुरू हुई अंतिम बैठक देर रात तक चली और कई बार बातचीत टूटने की कगार पर पहुंची, यहां तक कि एक चरण में मंत्री बैठक छोड़कर भी चले गए थे। हालांकि बाद में दोबारा बातचीत शुरू हुई और रात 12 बजे दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

यह विवाद करीब दो दशक से लंबित था, जिसमें कमांड एरिया के किसान सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग कर रहे थे, जबकि भराव क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना था कि पानी छोड़े जाने से उनके क्षेत्रों में भूजल स्तर प्रभावित होगा और पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है।
समझौते के तहत 50 करोड़ रुपये की पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजना के माध्यम से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से दोनों पक्षों की चिंताओं का समाधान किया गया है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले सात दिनों में बांध के नहर तंत्र की मरम्मत और पानी वितरण का तकनीकी शेड्यूल तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद पानी छोड़े जाने की अंतिम तारीख की घोषणा की जाएगी।
जानकारों का मानना है कि यह विवाद लंबे समय से राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामाजिक सहमति की कमी के कारण लंबित था, जिसे अब तकनीकी और व्यावहारिक समाधान के जरिए सुलझा लिया गया है।

