अयोध्या. राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में एसआईटी की प्रारंभिक जांच सात दिन में पूरी हो गई है. टीम 150 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आज सौंप सकती है. रिपोर्ट में बड़े खुलासे होने की संभावना है. बताया जा रहा है कि कानूनी सलाह लेने के बाद इस पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है. वहीं, ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों समेत कर्मचारियों को फिलहाल अयोध्या में ही रुकने के लिए कहा गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पीएमओ कार्यालय की ओर से भेजे गए एक आईपीएस अधिकारी की रिपोर्ट को भी इसमें शामिल किया जाएगा. बताया जा रहा है कि दोनों रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी सलाह भी ली जा सकती है. ये भी बातें आ रही हैं कि एफआईआर जैसी कार्रवाई के लिए एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि माना जा रहा है कि एसआईटी आगे की जांच के लिए और समय मांग सकती है.
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बता दें कि जांच के दौरान इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने 60 किलो चांदी को लेकर सवाल उठाया था. उनके मुताबिक देशभर के सराफा व्यापारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी भेजकर करीब 60 किलो चांदी इकट्ठा की थी. इस चांदी को गलाकर एक से सवा किलो वजन की ईंटें तैयार की गई थीं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र लिखा गया था. रस्तोगी के मुताबिक, 20 जुलाई 2020 को चंपत राय की सहमति के बाद ये चांदी की ईंटें अयोध्या स्थित रामकचहरी में सौंपी गई थीं.
रस्तोगी के मुताबिक उस दौरान समय चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और कैशियर प्रकाश गुप्ता उपस्थित थे. दान सामग्री स्वीकार करने के बाद शुद्धता प्रमाण पत्र और रसीद भी जारी की गई थी. रस्तोगी के मुताबिक इन ईंटों को नींव पूजन में उपयोग करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन बाद में दानदाताओं को इसकी कोई जानकारी नहीं मिली. ये भी दावा किया जा रहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से एक-एक किलो के दो चांदी के दीपक, दो चांदी के कटोरे, 200 ग्राम की पंचधातु सिल्ली और नाग-नागिन का जोड़ा दान किया था. लेकिन मंदिर बनने के बाद न तो दीपक दिखाई दे रहा है और न ही भगवान के भोग के लिए दान किए गए चांदी के कटोरे. रस्तोगी ने इन सभी दान सामग्री का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है.
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इन सबके बीच एक बात ये आ रही है कि लगातार मंदिर प्रबंधन पर लग रहे आरोपों से संदेह बढ़ता जा रहा है. मंदिर निर्माण के समय दान देने वाले श्रद्धालु अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. दान में दी गई वस्तुओं का सार्वजनिक हिसाब मांग रहे हैं. इतना ही नहीं रोजाना मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी भी दान देने से पीछे हट रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो प्रबंधन पर आरोप लगने के बाद से मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में कमी आई है. साथ ही दान में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

