कुंदन कुमार, पटना। आरजेडी के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता रीतलाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने संगठित अपराध और रंगदारी से जुड़े एक मामले में उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई और ट्रायल को लेकर कुछ अहम निर्देश भी दिए हैं।
पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मुहर
इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने रीतलाल यादव की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान रीतलाल यादव की तरफ से देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की और उनका पक्ष अदालत के सामने रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह पटना हाईकोर्ट के आदेश में किसी भी तरह का दखल नहीं देगा।
ट्रायल कोर्ट को जल्द आरोप तय करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत यानी ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि इस मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। अदालत ने यह भी साफ किया कि यदि आरोप तय होने की तारीख से अगले एक साल के भीतर ट्रायल की प्रक्रिया में कोई संतोषजनक प्रगति नहीं होती है, तो रीतलाल यादव के पास दोबारा पटना हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला रहेगा।
जमानत के लिए ट्रायल में सहयोग करना अनिवार्य
भले ही अदालत ने एक साल बाद दोबारा जमानत मांगने का रास्ता खुला रखा हो, लेकिन इसके साथ एक बेहद सख्त शर्त भी जोड़ी गई है। यदि रीतलाल यादव एक साल की अवधि के बाद हाईकोर्ट में फिर से जमानत की गुहार लगाते हैं, तो उन्हें यह साबित करना होगा कि उन्होंने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग किया है। यानी मुकदमे में किसी भी तरह की देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं होना चाहिए।
क्या है पूरा मामला और आरोप
यह पूरा कानूनी शिकंजा संगठित अपराध और रंगदारी के गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रीतलाल यादव और उनके सहयोगियों पर एक सक्रिय संगठित गिरोह चलाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का यह भी दावा है कि यह गिरोह मुख्य रूप से रियल एस्टेट कारोबारियों और अन्य व्यापारियों को डरा-धमकाकर रंगदारी और अवैध वसूली का काम करता है। इसके अलावा, इन अवैध गतिविधियों के जरिए अकूत संपत्ति और ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि, ये सभी अभी केवल आरोप हैं और मामले का अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट की सुनवाई और सबूतों के आधार पर ही तय होगा।
अब रीतलाल यादव की कानूनी किस्मत पूरी तरह से ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने और उसके बाद शुरू होने वाली मुकदमे की रफ्तार पर टिकी हुई है।



