Delhi first Solar Tree: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार (Rekha Gupta Government) क्लीन एनर्जी योजना को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली में ‘सोलर ट्री’ लगाने जा रही है। राजधानी दिल्ली में पहला ‘सोलर ट्री’ सचिवालय की बिल्डिंग में लगाने की योजना है। दिल्ली में लगने वाला यह पहला ‘सोलर ट्री’ होगा। इसके बाद दिल्ली सरकार क्लीन एनर्जी अपनाने की मुहिम के तहत इन्हें पूरी दिल्ली में फैलाया जा सकता है। दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इसी सचिवालय में बैठते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि दुनिया के कई शहरों में भी ऐसे सोलर ट्री देखे जा सकते हैं और जल्द ही दिल्ली में भी अपना सोलर ट्री होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार का बिजली विभाग सोलर प्लांट लगाने की योजना पर काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि सोलर ट्री एक तरह का ऐसा फोटोवोल्टिक (PV) पैनल होता है जो सूरज की रोशनी को अधिक से अधिक ऊर्जा में बदलने के लिए पेड़ जैसे स्ट्रक्चर में लगाए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि पीवी पैनल के अलावा पूरे सोलर सेटअप को पेड़ जैसी आकृति का रूप देने के लिए मेटल फ्रेम, प्लास्टिक और अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें शामिल इनोवेशन के स्तर के हिसाब से डिजाइन अलग-अलग हो सकते हैं। सोलर ट्री के पीवी पैनल से सोखी गई सूरज की रोशनी को बिजली में बदला जाता है और इसे स्ट्रक्चर के बेस में लगी बैटरी में स्टोर किया जाता है। साथ ही, पैनल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे घूम सकें और समय के साथ अधिक से अधिक सूरज की रोशनी सोख सकें।
सोलर सिस्टम और सोलर ट्री में क्या अंतर
आमतौर पर छत या जमीन पर लगने वाले सोलर सिस्टम के लिए बहुत ज्यादा चौड़ी जगह की जरूरत होती है, लेकिन सोलर ट्री खड़ी जगह (वर्टिकल स्पेस) का इस्तेमाल करता है। इसके स्ट्रक्चर में बीच में धातु का एक मुख्य हिस्सा (ट्रंक) होता है, जिसमें शाखाओं जैसे हिस्से सही कोण पर निकले होते हैं ताकि उन पर सोलर पैनल लगाए जा सकें।
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