रेवाड़ी। उम्र को पीछे छोड़कर रेवाड़ी की आशा झांझडीया ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे हरियाणा को गौरवान्वित किया है। 48 वर्षीय आशा ने महज छह दिन के अभियान में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस और अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर सफलतापूर्वक पहुंचकर तिरंगा फहराया। दोनों चोटियों से उन्होंने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया।

आशा झांझडीया ने 21 अगस्त को सुबह 9:07 बजे 5,642 मीटर ऊंची माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर तिरंगा फहराया। इसके बाद 29 अगस्त को सुबह 5:31 बजे उन्होंने 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो की उहुरू पीक पर पहुंचकर देश का तिरंगा लहराया।

39 साल की उम्र में फतह किया था एवरेस्ट

आशा के लिए पर्वतारोहण का जुनून नया नहीं है। उन्होंने वर्ष 2017 में 39 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में माउंट एवरेस्ट फतह किया था। चीन-तिब्बत की ओर से एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के बाद उन्होंने अब एल्ब्रुस और किलिमंजारो को भी अपने नाम कर लिया है।

पेशे से आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने पर्वतारोहण के अपने जुनून को जारी रखा। उनके पति अजय ताखर हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं। उनकी बेटी डॉक्टर और बेटा इंजीनियर है।

अब सातों महाद्वीपों की चोटियों का लक्ष्य

एवरेस्ट, एल्ब्रुस और किलिमंजारो फतह करने के बाद आशा झांझडीया ने अब अपना अगला लक्ष्य भी तय कर लिया है। वह ‘सेवन समिट्स मिशन 2026-27’ पूरा करना चाहती हैं। इस मिशन के तहत उनका लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराना है।
पर्वतारोहण के अलावा आशा एयर पिस्टल शूटिंग में भी सक्रिय हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में चार स्वर्ण और तीन कांस्य पदक अपने नाम किए थे।

आशा झांझडीया की इस उपलब्धि से रेवाड़ी में खुशी का माहौल है। उन्होंने यह साबित किया है कि उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारियां किसी जुनून को पूरा करने की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। उनकी सफलता खासतौर पर महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बनी है।