कुंदन कुमार, पटना‌। ​राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख नेता एजाज अहमद ने बिहार की एनडीए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बार-बार अधिकारियों और पदाधिकारियों को प्रशासनिक प्रोटोकॉल और नियमों का पालन करने के लिए पत्राचार करती है, ताकि माननीय सांसदों, विधायकों और पंचायती राज प्रतिनिधियों के मान-सम्मान का पूरा ख्याल रखा जा सके। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।

​बैठकों से गायब रहते हैं अधिकारी

​अधिकारियों का मनोबल इस हद तक बढ़ चुका है कि वे जनप्रतिनिधियों द्वारा बुलाई गई बैठकों में पहुंचते ही नहीं हैं। कई महत्वपूर्ण बैठकें अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण रद्द करनी पड़ जाती हैं। राजद नेता ने चिंता जताई कि ऐसी कार्यप्रणाली से यह प्रतीत होता है कि बिहार में अब जनतंत्र की जगह लोक पर तंत्र हावी हो गया है। इस तरह के रवैये से पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर हो रही है।

​सत्ता संरक्षित अधिकारियों पर उठ रहे सवाल

​एजाज अहमद ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि आखिर क्या कारण है कि एनडीए शासनकाल में ही प्रोटोकॉल की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं? सिर्फ कागजी पत्राचार करने से अधिकारियों की मानसिकता में कोई सुधार नहीं आ रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि सरकार के भीतर बैठे कुछ नेता ऐसे लापरवाह और बेलगाम अधिकारियों को सीधा संरक्षण दे रहे हैं, जिन्हें जनप्रतिनिधियों की गरिमा की कोई परवाह नहीं है।

​लोकतंत्र के लिए खतरनाक है यह राजनीति

​जनप्रतिनिधियों के मान-सम्मान में लगातार आ रही गिरावट किसी भी सूरत में उचित नहीं है। राजद का मानना है कि इस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। यदि समय रहते प्रशासनिक अमले पर नकेल नहीं कसी गई, तो जनता का जनप्रतिनिधियों और शासन व्यवस्था दोनों से विश्वास उठ जाएगा।