सहारनपुर. कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने के दौरान मिले कुएं जैसे ढांचे ने पुरातत्व विभाग का ध्यान खींचा है. सोमवार (7 सितंबर 2026) को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मौके पर पहुंची और संरचना समेत आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया. सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर बैरिकेडिंग भी की गई है.
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लखौरी ईंटों से बनी है संरचना
ASI के शुरुआती निरीक्षण में सामने आया कि जमीन के करीब 20 फीट नीचे मिली संरचना में लखौरी ईंटों का इस्तेमाल किया गया है. ये पतली और छोटी आकार की पकी हुई ईंटें हैं, जिनका इस्तेमाल उत्तर मध्यकालीन वास्तुकला में बड़े पैमाने पर हुआ था. अधिकारियों के मुताबिक, यह ढांचा कुएं जैसी संरचना प्रतीत हो रहा है.
200 से 250 साल पुराना होने का अनुमान
सहायक पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर ढांचा करीब 200 से 250 वर्ष पुराना हो सकता है. हालांकि, अभी इसकी उम्र को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है. वैज्ञानिक जांच और विस्तृत परीक्षण के बाद ही इसके वास्तविक कालखंड और प्रकृति की पुष्टि हो सकेगी.
चूना-सुर्खी और खास तरह की ईंटें मिलीं
संरचना में ईंटों को जोड़ने के लिए चूना-सुर्खी यानी लाइम मोर्टार का इस्तेमाल किया गया है. ऊपरी हिस्से पर चूने का प्लास्टर भी दिखाई दे रहा है. जमीन से करीब तीन फीट नीचे विशेष तरीके से काटी गई ‘मोल्डेड ब्रिक’ जैसी संरचना मिली है, जिसमें ईंटों को गोलाकार आकार दिया गया है.
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मलबे से दबा है निचला हिस्सा
कुएंनुमा ढांचे के भीतर भारी मात्रा में मलबा भरा हुआ है. इसके चलते संरचना के सबसे निचले हिस्से की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है. अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही पता चलेगा कि इसका वास्तविक इस्तेमाल क्या था और यह किस कालखंड से संबंधित है. फिलहाल ASI की टीम प्रारंभिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है.



