सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली के देवसर  सरकारी अस्पताल के परिसर में बने शासकीय आवास में नियमों को ताक पर रखकर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद प्रशासन ने जब मौके पर जांच की तो कार्रवाई करते हुए साई डायग्नोस्टिक सेंटर के पूरे परिसर को सील कर दिया गया।

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दरअसल, देवसर में पदस्थ डॉक्टर प्रदीप चौबे के अस्पताल में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने और निजी तौर पर घर में मरीजों का इलाज किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों की पड़ताल के लिए जब News24 की टीम देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची, तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि डॉक्टर आज अस्पताल में मौजूद नहीं हैं, जबकि उनकी उपस्थिति दर्ज होने की बात सामने आई।

इसी दौरान सरकारी आवास में निजी डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित होने की शिकायत भी सामने आई। मामले की भनक प्रशासन को लगते ही एसडीएम देवसर  सुशीर श्रीकृष्ण श्रीराम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर के पीछे बने शासकीय रेजिडेंशियल क्वार्टर में साई डायग्नोस्टिक सेंटर का संचालन नियमों और निर्धारित मानकों के विपरीत पाया गया। प्रशासन के मुताबिक डॉक्टर आनंद कुमार गुप्ता के शासकीय आवास में जोगीनी निवासी रामलौटन बैस द्वारा आवश्यक वैध अनुमति और दस्तावेजों के बिना सेंटर संचालित किया जा रहा था।

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एसडीएम ने सेंटर संचालक को तीन कार्य दिवस के भीतर अनुमति पत्र समेत सभी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। वहीं संबंधित डॉक्टर के खिलाफ भी नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने सेंटर को आगामी आदेश तक सील कर दिया है और इसकी सुपुर्दगी बीएमओ डॉ. सी.एल. सिंह को दी गई है। अब सवाल यह है कि सरकारी आवास में निजी सेंटर आखिर किसकी अनुमति से संचालित हो रहा था और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार कौन है।

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