सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। बीजेपी विधायक रामनिवास शाह के पिता उमा शाह अपनी जमीन के सीमांकन के लिए महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात ये है कि कार्रवाई आगे बढ़ने के बजाय मामला कागजों में ही उलझा नजर आ रहा है।
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बताया जा रहा है कि पटवारी की ओर से सीमांकन के लिए समिति तक गठित की गई थी। बावजूद इसके करीब तीन महीने तक सीमांकन नहीं हुआ। अब रिपोर्ट में कथित तौर पर यह लिख दिया गया कि उमा शाह सीमांकन कराना ही नहीं चाहते। जब आवेदक खुद सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, तो रिपोर्ट में सीमांकन नहीं कराने की बात कैसे लिखी गई।
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अब बड़ा सवाल ये है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर वास्तविकता जांची। या फिर सरकारी फाइलों में ही पूरी कहानी बदल दी गई। मामला विधायक के पिता से जुड़ा है, इसलिए सवाल और भी बड़ा है। जब विधायक के परिवार को सीमांकन के लिए महीनों इंतजार करना पड़े, तो आम आदमी की सुनवाई कितनी आसान होगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
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