वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले में डेयरी विकास और पशुपालन को नई गति देने की दिशा में सोमवार को कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नालंदा डेयरी परिसर में करीब 20 करोड़ की लागत से 20 एमटीपीडी क्षमता वाले दही एवं लस्सी प्लांट, कॉम्फेड द्वारा संचालित एचपीसीएल पेट्रोल पंप एवं सुधा कैफेटेरिया, पशु उठाव एवं परिवहन वाहन का लोकार्पण तथा 300 खुदरा विक्रेताओं को डीप फ्रीजर वितरित किया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका दीदियों के डेयरी प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी निरीक्षण किया।

लोगों को मिलेगा दुध का बेहतर मूल्य

आपको बता दें कि अभी तक नालंदा डेयरी में दही और लस्सी के उत्पादन के लिए अलग संयंत्र नहीं होने से त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में दूसरे डेयरियों से आपूर्ति करनी पड़ती थी। नए 20 एमटीपीडी प्लांट के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले पैकेज्ड दही और लस्सी का उत्पादन होगा। इससे परिवहन लागत घटेगी, अतिरिक्त दूध का बेहतर उपयोग होगा और दुग्ध उत्पादकों को बेहतर मूल्य मिलने का रास्ता खुलेगा।

300 दुकानदारों को मिला डीप फ्रीजर

कार्यक्रम के दौरान 300 चयनित खुदरा विक्रेताओं को डीप फ्रीजर भी उपलब्ध कराए गए। इससे सुधा के कोल्ड चेन नेटवर्क का विस्तार होगा और आइसक्रीम सहित अन्य फ्रोजन डेयरी उत्पाद ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कस्बों और दूरस्थ बाजारों तक सुरक्षित रूप से पहुंच सकेंगे।

पशु उठाव एवं परिवहन वाहन सेवा

दुर्घटनाग्रस्त एवं असक्त पशुओं के लिए आधुनिक पशु उठाव एवं परिवहन वाहन भी सेवा में शामिल किया गया। यह वाहन आपातकालीन पशु चिकित्सा सेवा के साथ-साथ मोबाइल वेटरिनरी हॉस्पिटल के रूप में भी कार्य करेगा। सहकार से समृद्धि अभियान के तहत एचपीसीएल पेट्रोल पंप और सुधा कैफेटेरिया की शुरुआत से कॉम्फेड को आय के नए स्रोत मिलेंगे। साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर सुधा ब्रांड की मौजूदगी बढ़ेगी, नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया निरीक्षण

इस अवसर पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका की पशु सखी, लिवलीहुड स्पेशलिस्ट और सीएलएफ नोडल के प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी निरीक्षण किया गया। अब तक नालंदा की 348, नवादा की 253 और शेखपुरा की 63 जीविका दीदियों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जबकि सोमवार को नालंदा की 40 और जीविका दीदियों का प्रशिक्षण संपन्न हुआ। प्रशिक्षित पशु सखियां आगे स्वयं सहायता समूहों की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देंगी, जिससे पशुपालन और डेयरी आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

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