जुबैर अंसारी, ​सुपौल। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आगामी 19 अगस्त को सुपौल जिले के बलुआ बाजार पहुंचेंगे। वे यहां बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

​प्रशासनिक तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था

​कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा खुद सुपौल के जिलाधिकारी (DM) सावन कुमार ले रहे हैं। सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए गए हैं कि परिंदा भी पर न मार सके। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हेलीकॉप्टर से सीधे बलुआ बाजार के हाई स्कूल मैदान में उतरेंगे। इसके बाद वे सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल यानी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पैतृक आवास पहुंचेंगे। आवास के ठीक सामने प्रतिमा अनावरण का समय पूर्वाह्न 11:00 बजे तय किया गया है।

​डॉ. जगन्नाथ मिश्र का राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन

​डॉ. जगन्नाथ मिश्र का जन्म 24 जून 1937 को सुपौल जिले के बलुआ बाजार में एक मैथिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि हासिल की और पेशेवर राजनीति में उतरने से पहले मुजफ्फरपुर के एक कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं।
​उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से हुई। उनके बड़े भाई ललित नारायण मिश्र भी केंद्र सरकार में कद्दावर रेल मंत्री रह चुके थे। डॉ. जगन्नाथ मिश्र अपने राजनीतिक जीवन में तीन अलग-अलग अवधियों 1975 से 1977, 1980 से 1983, और 1989 से 1990 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र सरकार में भी विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्री पदों की जिम्मेदारी संभाली और वर्ष 1988 से 1990 तथा 1994 से 2000 तक राज्यसभा के सम्मानित सदस्य रहे।

​ऐतिहासिक निर्णय और लोकप्रियता

​डॉ. जगन्नाथ मिश्र के दूसरे कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों ने उनकी लोकप्रियता में चार चांद लगा दिए। उन्होंने उर्दू को बिहार की दूसरी राजभाषा का दर्जा दिया, जो एक ऐतिहासिक कदम था। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने शिक्षकों के हितों का विशेष ध्यान रखा और कई निजी विद्यालयों का सरकारीकरण किया।
​वे राजनीति के साथ-साथ साहित्य और लेखन के क्षेत्र में भी खासे सक्रिय रहे। उन्होंने अर्थशास्त्र और सामाजिक विषयों पर 23 से अधिक पुस्तकों की रचना की। एक कुशल प्रशासक, जनप्रिय नेता और दूरदर्शी राजनेता के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले डॉ. जगन्नाथ मिश्र का निधन 19 अगस्त 2019 को हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर होने वाला यह प्रतिमा अनावरण समारोह राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।