मानसून सत्र 2026 में केंद्र सरकार एक बार फिर परिसीमन बिल को पेश कर सकती है. परिसीमन विधेयक को लेकर BJP को बड़ी राहत के संकेत मिल रहे है. संसद का मानसून सत्र कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है और ऐसे में परिसीमन विधेयक पर चर्चा जोरों पर है. अब शिवसेना UBT ने परिसीमन बिल पर सरकार को शर्तों के साथ समर्थन करने की घोषणा कर राजनीतिक जगत को चौंका दिया है. सरकार संसद के मॉनसून सत्र में, जो 20 जुलाई से शुरू हो रहा है.
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा परिसीमन का बिल संसद में पेश किया था लेकिन वह विपक्षी एकता के चलते गिर गया था.
ऐसे में संजय राउत ने कहा कि विपक्ष परिसीमन विधेयक का विरोध करेगा, लेकिन सरकार द्वारा सुझाए गए संशोधनों को शामिल करने पर विचार कर सकता है. केंद्र की नीतियों का प्रबल विरोधी रही शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी परिसीमन बिल का सपोर्ट कर सकती है.
संजय राउत नागपुर में पत्रकारों से बात कर रहे थे. जहां पर उनके बयान को परिसीमन बिल पर पॉजिटिव देखा गया है. इससे पहले बुधवार को लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले के बयान से संकेत मिले हैं कि अगर कुछ बातें मानी जाएं तो उनकी पार्टी समर्थन के लिए तैयार हो सकती है.
सुप्रिया सुले ने कहा है कि डिलिमिटेशन का बिल हमारे पास नहीं आया है जब बिल आयेगा उसका अध्ययन करके निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने ने कहा है कि सभी राज्यों में सीटों में एक समान 50 प्रतिशत बढ़ोतरी पर आधारित विधायी एजेंडा अगर रहता है, तो इसका विरोध करने का कोई खास कारण नहीं होगा.
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