मुकेश मेहता, बुधनी। परम पूज्य संत परमानंद परमहंस जी महाराज रविवार दोपहर बाद करीब 3 बजे 128 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने बरमान घाट के समीप स्थित अपने आश्रम में भौतिक शरीर का त्याग किया। गुरुदेव के ब्रह्मलीन होने का समाचार मिलते ही क्षेत्र सहित जिले, प्रदेश और देश-विदेश में रहने वाले उनके अनुयायियों एवं भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। रुद्र धाम आश्रम (रेहटी बुधनी )सहित आसपास का पूरा वातावरण गमगीन हो गया।
सोमवार को संत परमानंद परमहंस जी महाराज की इच्छा एवं पूर्व निर्देश के अनुसार मां नर्मदा के पवित्र तट पर समाधि स्थल का निर्माण कर विधि-विधान एवं संत-महात्माओं की उपस्थिति में उन्हें समाधि दी गई। समाधि अवसर पर क्षेत्रीय विधायक रमाकांत भार्गव सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे धार्मिक एवं राजनीतिक क्षेत्र के प्रमुख लोगों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कठिन तपस्या से अध्यात्म और लोककल्याण तक का सफर
संत परमानंद परमहंस जी महाराज ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के जंगलों एवं विंध्याचल की पर्वत श्रृंखलाओं में वर्षों तक कठिन तपस्या की। तपस्या के पश्चात उन्होंने अध्यात्म ज्ञान के माध्यम से हजारों भक्तों को धर्म और आध्यात्म की राह से जोड़ा। उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य लोककल्याण और मानव सेवा रहा। रुद्र धाम आश्रम में संचालित भंडारा और सेवा की परंपरा भी गुरुदेव की इसी लोककल्याण की भावना का प्रतीक है। आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसाद की निस्वार्थ व्यवस्था लंबे समय से की जाती रही है।
शिष्यों ने विभिन्न स्थानों पर स्थापित किए आश्रम
गुरुदेव के आशीर्वाद से उनके शिष्य संत पूज्य बजरंग गिरी जी महाराज ने भी तपस्या एवं सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया। बरमान घाट, जबलपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर मां नर्मदा के पवित्र तट पर आश्रम का निर्माण किया गया। इसके अलावा ग्राम मोगरा, मर्दानपुर, रमगढ़ा तथा रायसेन जिले के विसेर गांव में भी आश्रमों का निर्माण किया गया है, जहां द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना का कार्य जारी है। गुरुदेव के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से उनके शिष्य संत बजरंग गिरी जी महाराज द्वारा इन आश्रमों के माध्यम से आध्यात्मिक गतिविधियों एवं सेवा कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
आयुर्वेद का भी था विशेष ज्ञान
संत परमानंद परमहंस जी महाराज को आयुर्वेद का विशेष ज्ञान प्राप्त था। बताया जाता है कि वे जरूरतमंद लोगों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधियों की जानकारी एवं पर्ची लिखकर देते थे। पीलिया, किडनी, लीवर, बुखार सहित विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग उनके पास उपचार एवं मार्गदर्शन के लिए पहुंचते थे। गुरुदेव द्वारा सेवा भाव से लोगों का मार्गदर्शन किया जाता था।
संत-महात्माओं की मौजूदगी में हुई समाधि
सोमवार सुबह से ही रुद्र धाम आश्रम में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। क्षेत्रीय विधायक रमाकांत भार्गव सहित विभिन्न जिलों से आए धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र के प्रमुख लोगों और बड़ी संख्या में भक्तों ने गुरुदेव के अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मां नर्मदा के पवित्र तट पर संत-महात्माओं एवं महामंडलेश्वर की उपस्थिति में विधि-विधान से संत परमानंद परमहंस जी महाराज को समाधि दी गई। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘हर हर महादेव’ और गुरुदेव के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों की आंखें नम थीं और हर कोई अपने आराध्य संत को भावभीनी विदाई दे रहा था।
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