पंकज श्रीवास्तव, छपरा। ​सारण जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। छपरा से की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 7 प्रखंडों के 35 पंचायतों के 109 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे करीब 2 लाख 25 हजार आबादी प्रभावित हुई है। दिन का समय तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन रात होते ही अंधेरा, बिजली गुल होने की समस्या और सांप-बिच्छुओं का खतरा स्थानीय लोगों के लिए जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष बन जाता है।

​तटबंधों में कटाव और प्रशासन की सुस्ती से आक्रोश

​हालात तब और विकराल हो गए जब जिले के दो महत्वपूर्ण तटबंधों में कटाव शुरू हो गया। मांझी प्रखंड के इमादपुर तथा दरियापुर प्रखंड के मुजौना और सिमिरिहिया के बीच कटाव तेजी से जारी है। स्थिति का जायजा लेने के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री और सारण जिले के प्रभारी मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कटावग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने सूखा राशन, दवाइयों और पशुओं के चारे की तत्काल व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जिला प्रशासन द्वारा सामुदायिक रसोई और मेडिकल कैंप चलाए जा रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में अब तक राहत सामग्री न पहुंचने के कारण पीड़ितों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

​एनएच 19 बना आश्रय स्थल और अंतिम संस्कार का ठिकाना

​बाढ़ की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जिले का अवतार नगर थाना क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। एनएच 19 पर स्थित आमी गांव के पास श्मशान भूमि और वहां जाने वाले सभी मार्ग पानी में डूब चुके हैं। मजबूरी में स्थानीय लोगों को एनएच 19 पर ही शवों का दाह संस्कार करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, बेघर हुए लोगों ने अपने मवेशियों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर शरण ले रखी है।

​राहत कार्यों की गति और प्रशासनिक अपील

​हालाँकि कल के मुकाबले आज बाढ़ के जलस्तर में कुछ कमी दर्ज की गई है, लेकिन पीड़ितों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। जिलाधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी है कि प्रभावितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए कम्युनिटी किचन के दायरे को बढ़ाया जा रहा है और जगह-जगह चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में गहरे पानी की तरफ न जाएं और पूरी सावधानी बरतें।