अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। ऐतिहासिक नगरी सासाराम इन दिनों भीषण गर्मी और असहनीय उमस की चपेट में है। सूरज की तल्ख किरणें मानो आसमान से आग बरसा रही हैं। आलम यह है कि शहर की सड़कें दोपहर होते ही वीरान हो जा रही हैं और लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है और हर कोई अब सिर्फ मानसून की पहली फुहार का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
40 डिग्री का आंकड़ा, 47 डिग्री का एहसास
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सासाराम का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है। हालांकि, उमस और लू के थपेड़ों ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। फील लाइक (महसूस होने वाला) तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, जो लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। थोड़ी देर के लिए भी घर से बाहर निकलने पर लोग पसीने से पूरी तरह तर-बतर हो जा रहे हैं, जिससे चक्कर आने और बेहोशी जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा दबाव
इस जानलेवा गर्मी का सीधा असर स्वास्थ्य केंद्रों पर भी दिख रहा है। सासाराम के सदर अस्पताल में मरीजों की भीड़ में भारी उछाल आया है। विशेष रूप से मौसमी बीमारियों, निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) और लू के शिकार लोगों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सबसे अधिक समस्या उन कामकाजी लोगों को हो रही है, जिन्हें अपनी आजीविका के लिए हर हाल में बाहर निकलना पड़ता है। चिकित्सक भी अब इसे लेकर गंभीर चेतावनी जारी कर रहे हैं।
डॉक्टरों की सलाह: सावधानी ही बचाव है
गर्मी के इस विकराल रूप को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से हर हाल में बचें। यदि निकलना अनिवार्य हो, तो सिर को ढककर रखें और छाते का उपयोग करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें। तबीयत खराब होने पर तुरंत ओआरएस (ORS) का घोल पिएं और अस्पताल जाकर डॉक्टर की सलाह लें।
यह भीषण गर्मी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती है बल्कि आम लोगों की सहनशक्ति की भी परीक्षा ले रही है। जब तक मानसून का आगमन नहीं होता तब तक सावधानी बरतना ही एकमात्र उपाय है।

