सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में एआई के औपचारिक इस्तेमाल को लेकर रेगुलेशन्स फार यूज ऑफ एआई इन कोर्ट 2026 का ड्राफ्ट जारी कर सभी हितधारकों और आमजनता से सुझाव आमंत्रित किये है. इस ड्राफ्ट में कोर्ट में एआई का कैसे इस्तेमाल होगा उसके क्या नियम होंगे, इसके बारे में नियम तैयार किए जाएंगे. इसमें क्या सुरक्षा उपाय और एहतियात बरते जाएंगे इस सबका खाका भी तैयार किया गया है. जारी मसौदे में अदालतों में एआई के इस्तेमाल के रेगुलेशन का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय प्रधानता, जवाबदेही, डेटा सुरक्षा और न्यायिक स्वतंत्रता है.

AI सजा सुनाने का काम नहीं करेगा

कोर्ट में एआई के इस्तेमाल के लिए जो ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किये गए हैं उनमें कहा गया है कि आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हर समय इंसानी फैसले और न्यायिक अधिकार के अधीन रहेगा. हर एआई प्रणाली केवल एक सहायक की हैसियत से काम करेगी और किसी विधिवत नियुक्त न्यायिक अधिकारी यानी जज की जगह नहीं लेगी. कानून, तथ्यों और न्याय से संबंधित मामलों का निर्धारण करने का अंतिम अधिकार केवल न्यायाधीशों के पास होगा. कोई भी एआई सिस्टम किसी भी मामले में मानवीय हस्तक्षेप के बिना फैसले देने, सजा सुनाने का काम नहीं करेगा.

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली इस कमिटी में जस्टिस संजीव सचदेवा, राजा विजयराघवन वी., अनूप चितकारा और सूरज गोविंदराज सदस्य के तौर पर शामिल हैं. कमिटी ने अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबंधित पक्षों और आम जनता से राय और सुझाव मांगे हैं. ये सुझाव 20 जून तक जमा करने होंगे.

ड्राफ्ट में क्या कहा गया है?

ड्राफ्ट के मुताबिक, कोर्ट की प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले AI सिस्टम को इस तरह से डिजाइन, ट्रेन और लागू किया जाना चाहिए कि वे निष्पक्षता को बढ़ावा दें और भेदभाव से बचें. इसमें आगे कहा गया है कि ऐसा कोई भी AI सिस्टम लागू नहीं किया जाएगा जो नस्ल, धर्म, जाति, लिंग, विकलांगता, भाषा, आर्थिक स्थिति या संविधान या किसी मौजूदा कानून के तहत प्रतिबंधित किसी अन्य आधार पर भेदभाव को बढ़ावा दे, उसे बढ़ाए या पैदा करे. साथ ही, महिलाओं, बच्चों, विकलांग लोगों, हाशिए पर रहने वाले और अल्पसंख्यक समुदायों, आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों जैसे कमजोर समूहों के अधिकारों और हितों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा.