कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। आदिवासियों की जमीन पर कथित कब्जे और हस्तांतरण के मामलों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए गुना कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है और 28 जुलाई को रिकॉर्ड सहित पेश होने के निर्देश दिए हैं। हाइकोर्ट ने पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये आदिवासियों की जमीन के कब्जे और हस्तांतरण पर सवाल खड़े किए है।

फर्जी हस्तांतरण से जुड़े मामले की सुनवाई

आदिवासी जमीनों पर कथित कब्जे और फर्जी हस्तांतरण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट को भ्रामक और गोलमोल बताया। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने केवल औपचारिकताएं निभाई हैं। सुनवाई में सामने आया कि गुना जिले में 139 और अशोकनगर में 54 एससी-एसटी भूमि मालिकों की जमीन पर कब्जे की शिकायतें हैं।

राज्यव्यापी समीक्षा करने की आवश्यकता

यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वास्तविक बटाईदार कौन हैं और कौन अतिक्रमणकारी, हाईकोर्ट ने इस मामले में गुना कलेक्टर को शपथपत्र के साथ 28 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने अन्य जिलों में भी आदिवासी भूमि मामलों की राज्यव्यापी समीक्षा करने की आवश्यकता जताई है।

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