कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश की ग्वालियर जिला कोर्ट में आज भी देश के सबसे चर्चित राजघरानों में शामिल सिंधिया राजपरिवार के करीब 40 हजार करोड़ रुपये के पैतृक संपत्ति विवाद पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। उम्मीद थी कि दशकों पुराना विवाद आज आपसी समझौते के साथ समाप्त हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। क्योंकि बीती सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जिन संपत्तियों का रिकॉर्ड तलब किया था वह आज भी सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश नहीं कीया जा सका। ऐसे में कोर्ट ने मामले की सुनवाई 28 जुलाई तय करते हुए रिकॉर्ड रूम से संपत्ति विवाद के दस्तावेज कोर्ट में तलब किए है।
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दरअसल सिंधिया राजपरिवार में पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद की शुरुआत साल 1988-89 में हुई थी। बाद में वर्ष 2001 में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद यह विवाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं वसुंधरा राजे,यशोधरा राजे,उषा राजे के बीच जारी रहा,सालों तक मामला जिला न्यायालय में विचाराधीन रहा।
आज जिला न्यायालय में दोनों पक्षों के समझौते पर सुनवाई हुई,माना जा रहा था कि सभी पक्ष अदालत में अपनी सहमति दर्ज कराकर दशकों पुराने विवाद का पटाक्षेप कर देंगे। लेकिन बीती सुनवाई की तरह ही आज भी संपत्ति विवाद से जुड़ा रिकॉर्ड दस्तावेज कोर्ट में पेश नहीं हो सका। ऐसे में कोर्ट ने रिकॉर्ड रूम से संपत्ति विवाद के दस्तावेज कोर्ट में 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई के दौरान पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके पहले की सुनवाई के दौरान चर्चा सामने आई थी कि एक पक्ष ने समझौते के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति भी दर्ज कराई थी,जिसके चलते बीती सुनवाई की तरह ही दोनों पक्षों ने अपना पक्ष रखने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा था।
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करीब 40 हजार करोड़ रुपये कीमत की इस पैतृक संपत्ति में जयविलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, रानी महल, छोटी विश्रांति, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, दिल्ली का सिंधिया विला, ग्वालियर हाउस, वाराणसी का सिंधिया घाट समेत कई ऐतिहासिक संपत्तियां और अन्य परिसंपत्तियां शामिल हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस वारिस को कौन-सी संपत्ति मिलेगी। अंतिम तस्वीर अदालत की मंजूरी के बाद ही सामने आएगी।
करीब चार दशक से चल रही सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति विवाद की कानूनी लड़ाई अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। हालांकि आज समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी,लेकिन यदि अगली सुनवाई में सभी पक्ष सहमत हो जाते हैं, तो देश के सबसे चर्चित पारिवारिक संपत्ति विवादों में से एक का पटाक्षेप हो जाएगा।
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