Shivarpanam Jaipur: सावन के पावन महीने में भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले बेलपत्र, फूल और अन्य पूजा सामग्री अब कचरे में नहीं जाएगी। जयपुर नगर निगम ने धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए Shivarpanam नाम से नई पहल शुरू की है। इसके तहत मंदिरों से एकत्रित जैविक निर्माल्य को वैज्ञानिक प्रक्रिया से जैविक खाद में बदला जाएगा और बाद में इसे शिवार्पणम् प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा।

क्या है Shivarpanam पहल?
नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल मंदिरों की सफाई बनाए रखना नहीं है। इसका मकसद धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना भी है। पूरे श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार नगर निगम का ईवी हॉपर वाहन चयनित मंदिरों से बेलपत्र, फूल और अन्य जैविक निर्माल्य एकत्र करेगा।
30 दिन में तैयार होगी जैविक खाद
एकत्रित सामग्री को पास के उद्यान में लगी श्रेडर मशीन से प्रोसेस किया जाएगा। इसके बाद कम्पोस्ट पिट में लगभग 30 दिनों तक वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार होगी। तैयार खाद को विशेष पैकेट में पैक कर शिवार्पणम् प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं और नागरिकों को वितरित किया जाएगा।
इन 5 शिव मंदिरों से होगी शुरुआत
- ताड़केश्वर महादेव मंदिर
- झारखंड महादेव मंदिर
- जंगलेश्वर महादेव मंदिर
- चमकारेश्वर महादेव मंदिर
- रोजगारेश्वर महादेव मंदिर
आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने कहा कि भगवान शिव को अर्पित हर बेलपत्र और पुष्प श्रद्धा का प्रतीक है। उसका स्थान कचरे में नहीं, बल्कि धरती की सेवा में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवार्पणम् ऐसा मॉडल है, जो आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ता है।
पढ़ें ये खबरें
- सऊदी अरब में हूती हमलों के बीच भारतीय दूतावास का अलर्ट, नागरिकों से कहा- दिशा निर्देशों का पालन करें
- रेखा सरकार ने ई-रिक्शा पर ड्राफ्ट जारी किया: लोगों से मांगा सुझाव, यात्रियों की संख्या और सामान का वजन तय हो सकता है
- GT Road पर आधी रात बड़ा हादसा, सेब से लदे कैंटर में पीछे से घुसी बस; 8 लोग गंभीर
- देवराज दीवान की पुण्यतिथि पर दीपेंद्र हुड्डा का भाजपा पर हमला, बोले- चुनावी वादे पूरे करने में नाकाम रही सरकार
- CJP पर भड़के छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन दास! बोले- ‘ये कॉकरोच हैं, रावण दहन पर इनका भी दहन कर दें’
