सहारनपुर. मस्जिद के भूमि विवाद में जिला जज की अदालत के आदेश के बाद मस्जिद को सील कर तड़के बुलडोजर की कार्रवाई कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई. जिस पर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने नाराजगी जताई. उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यह कार्रवाई भाजपा सरकार की साम्प्रदायिक राजनीति और अपने समर्थकों के तुष्टीकरण का एक और उदाहरण है.
आगे उन्होंने कहा कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के भूमि विवाद में जिला जज की अदालत द्वारा 3 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश (बेदखली, ध्वस्तीकरण और 6 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति) को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज करने के बाद 4 सितंबर, शुक्रवार को एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट का भारी पुलिस बल के साथ मस्जिद को सील कर आज सुबह 5 बजे अंधेरे में ध्वस्त करने का कार्य न केवल जल्दबाजी में लिया गया कदम है, बल्कि मस्जिद पक्ष को उपलब्ध न्यायिक उपचार के अवसर को कमजोर करने और न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण तक पहुंचने से पहले ही कार्रवाई कर देने वाला कदम है.
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आगे चंद्रशेखर ने कहा कि हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन यह मामला बेहद संवेदनशील है. मस्जिद पक्ष का कहना है कि न्यायालय ने उनके द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण साक्ष्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर समुचित विचार नहीं किया. उन्होंने पुराने राजस्व अभिलेखों, वक्फ पंजीकरण, 1947 से पहले के अस्तित्व और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 से जुड़े प्रावधानों के साथ 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल, नगर पालिका परिषद में दर्ज नाम सहित अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत किए हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि मस्जिद पक्ष का दावा है कि संबंधित मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और भूमि वक्फ संपत्ति का हिस्सा है. खेवट नंबर 10/1 का उल्लेख करते हुए यह भी दावा किया गया है कि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि वाहिद खान और याकूब खान के नाम दर्ज है और संपत्ति 1947 से पहले की है. मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है.
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चंद्रशेखर ने ये भी कहा कि अब जबकि मस्जिद को ध्वस्त किया जा चुका है, सवाल यह है कि उच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती के विकल्प के बावजूद प्रशासन ने इतनी जल्दबाजी में कार्रवाई क्यों की? जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि वे अभी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, इसके बावजूद सुबह 5 बजे इस कार्रवाई को अंजाम देने की क्या आवश्यकता थी? यह कार्रवाई भाजपा सरकार की साम्प्रदायिक राजनीति और अपने समर्थकों के तुष्टीकरण का एक और उदाहरण है. यह अन्याय याद रखा जाएगा!



