वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले में हाल ही में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा कर दिया है, जिसके चलते जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। अस्थावां और बिन्द प्रखंडों में नदी के दबाव के कारण सुरक्षा बांध क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, प्रशासनिक तत्परता और युद्धस्तर पर चलाए गए मरम्मत अभियानों के कारण स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।
कैसे बिगड़े हालात और कहां हुआ नुकसान?
गत 3 सितंबर को विभिन्न नदियों के जलस्तर में अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस प्राकृतिक दबाव को जिले की नदियां झेल नहीं पाईं, जिसका परिणाम यह हुआ कि अस्थावां प्रखंड के ओन्दा पंचायत और ग्राम के पास तथा बिन्द प्रखंड के उतरथू गांव के समीप जीराइन नदी का तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। तटबंध के टूटने की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो गईं। तटबंध टूटने से खेतों और निचले इलाकों में पानी भरने का अंदेशा गहरा गया था, जिससे किसानों और स्थानीय निवासियों में संभावित बाढ़ को लेकर भारी चिंता फैल गई।

युद्धस्तर पर उतरा प्रशासन, मरम्मत कार्य अंतिम चरण में
घटना की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, बिहारशरीफ की तकनीकी टीमें बिना देर किए सक्रिय हो गईं। प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में मौके पर ही कमान संभालते हुए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य का आगाज किया गया।
ताजा प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति अब काफी हद तक संभल चुकी है:
- बिन्द प्रखंड: उतरथू गांव के पास क्षतिग्रस्त हुए तटबंध की मरम्मत का कार्य पूरी तरह से संपन्न हो चुका है, जिससे वहां का खतरा टल गया है।
- अस्थावां प्रखंड: ओन्दा में चल रहा मरम्मत कार्य अपने अंतिम चरण में है, जहां लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष बचे हुए 10 प्रतिशत कार्य को भी तेज गति से पूरा किया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
आपातकालीन व्यवस्थाएं और नियंत्रण कक्ष सक्रिय
संभावित बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने के वास्ते जिला आपातकालीन संचालन केंद्र को 24 घंटे और सातों दिन (24/7) पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। इसके अलावा, जिले में गत 15 जून 2026 से ही बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जा चुकी है, जो तीनों पालियों में लगातार मुस्तैदी के साथ अपनी सेवाएं दे रहा है।
प्रशासन की इस समन्वयक कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा या संकट की घड़ी में वे जनता की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस तेज प्रतिक्रिया पर राहत की सांस ली है, और अब केवल ओन्दा में बचे हुए अंतिम चरण के काम को पूरा करने पर पूरी निगाहें टिकी हुई हैं।



