कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश में लंबित और संवेदनशील 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई को आगे टालने से साफ इंकार कर दिया और आगामी 24 जून से इस पर ‘रेगुलर’ (नियमित) सुनवाई करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस के ट्रांसफर होने की वजह से अब इस पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू की जाएगी।

24 जून को तय होगा बहस का समय

24 जून से शुरू होने जा रही इस अंतिम और नियमित सुनवाई के पहले दिन कोर्ट यह तय करेगा कि किस पक्ष के वकील को अपनी दलीलें रखने के लिए कितना समय दिया जाएगा। कोर्ट का उद्देश्य मामले की समयबद्ध और त्वरित सुनवाई पूरा करना है, ताकि इस पर जल्द से जल्द अंतिम फैसला आ सके।

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वकील के विरोध पर HC सख्त

सुनवाई के दौरान आज भी कुछ पक्षों द्वारा मामले को आगे बढ़ाने और सुनवाई टालने की मांग की जा रही थी। लेकिन ओबीसी पक्ष के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रत्नु ने इसका कड़ा विरोध किया। वकील रत्नु के विरोध के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई टालने से साफ मना कर दिया। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, “यह मामला पहले ही बहुत लेट हो चुका है, अब किसी भी कीमत पर सुनवाई नहीं टलेगी। खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की समय पर सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने में सुनवाई पूरी करने कहा

बता दें कि ओबीसी आरक्षण और इसके विरोध से जुड़े हुए कुल 90 प्रकरणों (केसों) पर एक साथ सुनवाई चल रही है। इससे पहले 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मामलों को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया था। देश की सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिए थे कि हाईकोर्ट 3 महीने के भीतर इस पूरे मामले की सुनवाई प्रक्रिया को मुकम्मल करे। चीफ जस्टिस के बदलाव के बाद अब नए सिरे से होने जा रही इस रेगुलर सुनवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस फैसले पर मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का भविष्य तय होना है।

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शशांक रत्नु, सुप्रीम कोर्ट के वकील

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