सुरेश पाण्डेय, Singrauli. मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में लगातार दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जिला मुख्यालय वैढ़न शहर की जल निकासी व्यवस्था की पूरी तरह से पोल खोलकर रख दी है। इंदौर के बाद प्रदेश में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाली नगर निगम होने के बावजूद, करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर के चारों तरफ केवल जलजमाव की स्थिति बनी हुई है।
इस अव्यवस्था के कारण सड़कों से लेकर लोगों के प्रतिष्ठानों और निजी अस्पतालों तक में पानी भर गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें: Sahdol में रोंगटे खड़े करने वाली घटना: धुंधलके में भालू के करीब गया किसान, सोन नदी के किनारे जिंदगी की जंग हारा
प्रमुख मार्ग बने तालाब, निजी अस्पताल में घुसा पानी
दो दिनों की लगातार बारिश के कारण जिला मुख्यालय के कई प्रमुख इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया है। शहर के जो इलाके जलमग्न हुए:
- रामलीला मैदान का एक हिस्सा
- मुख्य बस स्टैंड और काली मंदिर रोड
- बैढ़न डिग्री कॉलेज रोड व डीएवी रोड
- IDBI Bank के समीप स्थित आरना केयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
अस्पताल परिसर और उसके आसपास भारी जलभराव होने के कारण वहां भर्ती मरीजों में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ गया है। इसके साथ ही मरीजों और उनके परिजनों को घुटने भर पानी से गुजरकर अस्पताल तक पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

पूर्व नगर निगम अध्यक्ष के टाल में भरा पानी, लाखों का नुकसान
जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण अयाज सामिल मार्ग पर स्थित नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष मरहूम अयाज खान के टाल सहित आसपास के कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पानी घुस गया। इसके चलते व्यापारियों का लाखों रुपये का सामान भीगकर बर्बाद हो गया है।

10 साल से नहीं मिला समस्या का स्थायी समाधान
अयाज सामिल के संचालक शहनवाज उर्फ मेनाज खान ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि इस विकराल समस्या को लेकर कई बार नगर निगम आयुक्त और महापौर को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। लेकिन पिछले लगभग 10 वर्षों से इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका। हर साल बारिश में यही स्थिति बनती है और इस बार भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

मास्टर प्लानिंग के विपरीत निर्माण कार्य का आरोप
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा शहर में जो भी निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, वे मास्टर प्लानिंग के अनुरूप नहीं हैं। यही वजह है कि हर साल हल्की या तेज बारिश होते ही शहर डूबने लगता है। लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय के वीआईपी और प्रमुख मार्गों का यह हाल है, तो अंदरूनी वार्डों और गली-मोहल्लों की दुर्दशा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

जिम्मेदारों का क्या है कहना?
महापौर रानी अग्रवाल ने कहा कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए करीब 2 से ढाई करोड़ रुपये की लागत से एक विशेष कार्य योजना पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की ठोस कार्रवाई की जाएगी।
ये भी पढ़ें: Gwalior NEWS: 111 करोड़ की बर्बादी पर हाई कोर्ट सख्त, सीवरेज प्रोजेक्ट पर सरकार को फटकार- “प्रशासन गहरी नींद में है”
पार्षद प्रतिनिधि ने कहा कि बारिश के समय केवल नालों की सतही सफाई करा देने से इस गंभीर समस्या का हल नहीं होने वाला है। इसके लिए नगर निगम सहित सभी संबंधित विभागों को आपस में समन्वय बनाकर एक मजबूत और स्थायी कदम उठाना होगा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

