दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय से सक्रिय वाहन चोरी के एक बड़े नेटवर्क का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, बुलंदशहर निवासी अमित नागर इस संगठित गिरोह का सरगना है और उसके नेटवर्क ने बीते वर्षों में 200 से अधिक वाहन चोरी कर उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों में खपाया। मामले में क्राइम ब्रांच ने अमित नागर समेत पांच आरोपियों पर मकोका (MCOCA) के तहत कार्रवाई की है।
रोहिणी में सोसायटी अध्यक्ष बनकर छिपा था आरोपी
पुलिस के अनुसार, अमित नागर पर अकेले ही वाहन चोरी के 50 से अधिक मामले दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस से बचने और अपनी आपराधिक गतिविधियों को छिपाने के लिए उसने कई साल पहले दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-29 में ठिकाना बनाया था। खास बात यह है कि वह यहां की एक आवासीय सोसायटी का अध्यक्ष भी बना हुआ था।
पांच साल से पुलिस को दे रहा था चकमा
डीसीपी क्राइम ब्रांच संजीव कुमार यादव के मुताबिक, पुलिस ने जांच के दौरान प्रमोद नागर, अशरफ सुल्तान, एटम नागर सिंह और पोत्संगबाम मुकेश सिंह को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया। पूछताछ में अमित नागर की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक, वह करीब पांच साल से पुलिस की गिरफ्त से बच रहा था।
वाहन चोरी से कमाई, कई राज्यों में सप्लाई
जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य चोरी किए गए वाहनों को बेचकर आर्थिक लाभ कमाना था। गिरोह दिल्ली, मणिपुर, मेरठ, मुरादाबाद और संभल समेत कई क्षेत्रों में नेटवर्क फैलाए हुए था। पुलिस का दावा है कि चोरी के वाहनों को देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय छोटे आपराधिक गिरोहों के जरिए खपाया जाता था।
संगठित अपराध के चलते लगाया गया MCOCA
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्यों के खिलाफ दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच के बाद 10 जुलाई को मकोका लगाने का प्रस्ताव भेजा गया था। कानूनी राय मिलने के बाद अमित नागर, प्रमोद नागर, अशरफ सुल्तान, एटम नागर सिंह और पोत्संगबाम मुकेश सिंह पर मकोका लगाया गया। पुलिस के मुताबिक, पिछले दस वर्षों में अमित नागर और उसके सहयोगियों के खिलाफ दिल्ली समेत अन्य राज्यों की अदालतों में कई आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं।
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