अधिक मास को लोग थोड़ा अलग नजर से देखते हैं, क्योंकि ये हर साल नहीं आता। करीब तीन साल बाद ये समय आता है, इसलिए लोग इसमें मिलने वाले पुण्य को गंवाना नहीं चाहते।

Lalluram Desk. ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा निकलते ही अब कृष्ण पक्ष के ये 15 दिन शुरू हो गए हैं। 15 जून तक अधिक मास रहने वाला है। अधिक मास में कई श्रद्धालु तो ऐसे भी दिखे जो पिछले कुछ दिनों से लगातार व्रत और पूजा में लगे हुए हैं। कोई अपने घर में ही पूजा कर रहा है, तो कोई मंदिर जाकर जल चढ़ा रहा है। कुछ जगहों पर भजन-कीर्तन भी शुरू हैं, जिससे माहौल धार्मिक-सा बना हुआ है।

खान-पान में बदलाव

पंडितों की मानें या आम लोगों की बात सुनें, एक चीज कॉमन है, इन दिनों में लोग थोड़ा ज्यादा सजग हो जाते हैं। खान-पान में भी बदलाव दिखता है, कई लोग अनाज छोड़ देते हैं। तो कुछ सिर्फ फला हार पर रहते हैं। हां, हर कोई पूरा नियम नहीं निभा पाता, लेकिन अपने हिसाब से जुड़ने की कोशिश जरूर करता है।

यही वजह है कि इन 15 दिनों को लोग हल्के में नहीं लेना चाहते, थोड़ा-बहुत ही सही, लेकिन कुछ न कुछ जरूर करते हैं। ऐसे में यदि इन 15 दोनों का लाभ लेना है तो कौन-कौन सी तिथि आने वाली है।

3 जून को संकष्टी चतुर्थी

इस दिन गणेश जी का व्रत रखा जाएगा। शाम को चांद देखने के बाद ही व्रत खोला जाता है । कई लोग पूरे दिन फलाहार पर रहते है।

6 जून को कालाष्टमी

भैरव बाबा की पूजा का दिन है। कुछ श्रद्धालु रात में भी मंदिर जाते है। दीप जलाते है, ऐसा कहा जाता है कि इससे डर-भय कम होता है।

10 जून को एकादशी

विष्णु जी का दिन बेहद खास है। इस दिन निर्जला एकादशी है जो बाकी है 23 एकादशी में सबसे कठिन मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु के लिए पूरे दिन बिना पानी पिए निर्जल उपवास रखेंगे। साथ ही जल से भरे मटके पर आम, चीनी, पंखा, तोलिया रखकर दान करेंगे।

12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत

शाम के समय शिव मंदिरों में भीड़ बढ़ जाती है। लोग जल, दूध चढ़ाते हैं और दीपक जलाते हैं। इस दिन महादेव की पूजा करने का समय शाम को 7 बजकर 36 मिनट से 09 बजकर 20 मिनट तक है।

13 जून को मासिक शिवरात्रि

रात में कुछ लोग जागरण भी करते हैं, ओम नम: शिवाय का जाप चलता रहता है। पूजन का शुभ मुहूर्त:मासिक शिवरात्रि पर पूजा का शुभ समय (निशिता काल) रात 12:01 एएम से 12:41 एएम (14 जून) तक रहेगा।

14 जून को अमावस्या

इस दिन लोग नदी या तालाब पर जाकर पितरों के लिए जल देते हैं। गरीबों को खाना या कपड़े देना भी देखा जाता है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगी।

अधिक मास के इन 15 दिनों में क्या करें?

सुबह थोड़ा जल्दी उठकर स्नान कर लें, घर में ही भगवान का नाम ले लें तो भी ठीक है । अगर व्रत नहीं रख पा रहे तो कोई बात नहीं। बस मन से पूजा कर लें। जितना बन पड़े उतना दान कर दें।

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