जुबैर अंसारी/सुपौल। जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति उस समय सवालों के घेरे में आ गई जब एक संगीन मामले के नामजद आरोपी पुलिस की मौजूदगी के बावजूद खुलेआम घूम रहे हैं। परमानंदपुर पंचायत की निवासी समतोलिया देवी ने SC/ST थाना सुपौल में ताउद्दीन अंसारी और उनके पुत्र जुल्फेकार अंसारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।

​क्या है पूरा मामला?

​पीड़िता समतोलिया देवी के अनुसार आरोपियों ने न केवल उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया बल्कि उनकी आबरू लूटने का भी प्रयास किया। पीड़िता का कहना है कि आस-पास के लोगों के समय पर पहुंच जाने के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई। इस मामले में थानाध्यक्ष सोनू कुमार ने SC/ST थाना कांड संख्या 41/26 दर्ज किया और पीड़िता का बयान भी दर्ज किया। हालांकि पुलिस के आरोपियों के घर पहुंचनेके बावजूद गिरफ्तारी न होने से स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

​आदतन अपराधी है जुल्फेकार अंसारी

​आरोपी जुल्फेकार अंसारी का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। वह कुख्यात अपराधियों का करीबी रिश्तेदार बताया जाता है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो वरिष्ठ पत्रकार जुबैर अंसारी की हत्या के लिए जुल्फेकार ने कुख्यात मो. शमीम को सुपारी दी थी जिसके बाद पत्रकार का अपहरण कर लिया गया था। इस मामले में बीरपुर बलुआ थाना कांड संख्या 221/2025 दर्ज है।

​इतना ही नहीं, जुल्फेकार पर पहले भी कई मामले दर्ज हैं:

  • ​बीरपुर थाना: सगे रिश्तेदार जलालुद्दीन अंसारी को जान से मारने की धमकी देने का मामला।
  • ​आर्म्स एक्ट और लूटपाट: जिरवा निवासी अशोक यादव द्वारा दर्ज कराया गया मामला, जिसके चलते आरोपी जेल की हवा भी खा चुका है।
  • ​न्यायिक हस्तक्षेप: वार्ड पंच मुस्तफा अंसारी द्वारा जान से मारने की धमकी को लेकर बीरपुर कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

​पुलिस की कार्यशैली पर गहराता अविश्वास

​इतने गंभीर और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड होने के बावजूद पुलिस का इस तरह का रवैया न्याय व्यवस्था की साख पर बट्टा लगा रहा है। पीड़िता का परिवार डरा हुआ है और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठा है। अब देखना यह होगा कि सुपौल पुलिस इस शातिर अपराधी को कब तक सलाखों के पीछे भेजती है या मामला महज फाइलों में दबकर रह जाएगा।