तमिलनाडु CM विजय ने विधानसभा में एक बड़ी घोषणा की. DMK सरकार के कार्यकाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का ऐलान किया है, जिसके बाद सभी किसानों और शिक्षकों में एक खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. सरकार ने कहा कि यह फैसला मानवीय आधार पर और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

तमिलनाडु की TVK सरकार ने पिछली DMK सरकार के कार्यकाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का ऐलान किया है.

तमिलनाडु की विजय थलपति सरकार ने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का बुधवार ऐलान किया है. हालांकि, सरकार के इस फैसले के बाद विधानसभा में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया.

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने नियम 110 के तहत एलान करते हुए कहा कि मई 2021 और अप्रैल 2026 के बीच दर्ज केस वापस लिए जाएंगे, जिन्होंने आजीविका, अधिकारों और कल्याणकारी मुद्दों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया था.

उन्होंने तिरुवन्नामलाई जिले में सिपकॉट इंडस्ट्रियल एस्टेट का विरोध कर रहे किसानों पर दर्ज मामलों का जिक्र किया, जिनमें कुछ मामलों में किसानों पर ‘गुंडा एक्ट’ के तहत कार्रवाई की गई थी.

विपक्ष ने फैसले की मंशा पर सवाल उठाते हुए मांग की कि नई सरकार के कार्यकाल में प्रदर्शन करने वाले किसानों पर दर्ज मामलों में भी इसी तरह की राहत दी जाए. इस बीच, CPI ने टीवीके सरकार से मांग की है कि वे नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के खिलाफ विरोध करने वाले लोगों (जिनमें छात्र भी शामिल हैं) पर दर्ज मामले भी वापस लें.

सीएम विजय ने यह फैसला इंसानियत के नाते और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए लिया है. उन्होंने कहा, हमारी सरकार हमेशा किसानों और शिक्षकों के साथ खड़ी रहेगी.

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