Tanvi Death Case Delhi AIIMS: यह खबर हमारे देश के सिस्टम में किस तरह भर्राशाही (अव्यवस्था, मनमानी) हावी उसका मात्र उदाहरण है। जहां देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) में 15 साल की तन्वी को इलाज की जगह मौत मिली। तन्वी को हार्ट सर्जरी (Heart Surgery) की जगह Delhi AIIMS से सिर्फ तारीख पर तारीख मिली। आखिरकार 11 साल के लंबे इंतजार के बाद मासूम तन्वी मौत से जंग हार गई। अब तन्वी की मौत मामले में एम्स दिल्ली ने जांच कमेटी गठित की। लेकिन सवाल यह है कि जांच कमेटी गठित करने के बाद क्या दिल्ली एम्स एक मां की सूनी गोद में फिर से तन्वी को लौटा सकती है। जवाब है.. बिलकुल नहीं।

दरअसल 15 वर्षीय बच्ची तन्वी जन्मजात दिल की जटिल बीमारी से जूझ रही थी। तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने कहा कि वे अपनी फूल की तरह मासूम बच्ची को पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को एम्स लेकर आए थे। शुरुआती जांचों में ही एक साल का वक्त लग गया।

पिता का दावा है- 4 अप्रैल 2014 को डॉक्टर के कहने पर ऑपरेशन के लिए पैसे और खून जमा करा दिया गया, लेकिन 2015 तक सर्जरी टलती रही। थक-हारकर जब पीएमओ (PMO) में शिकायत की गई, तो अस्पताल से बुलावा आया। आरोप है कि डॉक्टरों ने शर्त रखी कि जब तक शिकायत वापस नहीं ली जाएगी। ऑपरेशन नहीं होगा। पिता ने बताया कि 2025 और फिर फरवरी 2026 में भी शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हर बार डॉक्टर छुट्टी पर मिले या जांच पर जांच लिखते रहे। पिता ने भावुक होकर कहा, “अगर मेरी बेटी का ऑपरेशन 2015, 2016 या 2017 में हो जाता तो वह आज जिंदा होती। मुझे इंसाफ चाहिए, हम शव लेने से पहले अपने वकील के जरिए एफआईआर दर्ज कराने जा रहे हैं।

तन्वी के पिता अस्पताल प्रशासन के खिलाफ FIR दर्ज करवाएंगे

अब अपनी मासूम बच्ची को खोने के बाद पिता ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ते हुए FIR दर्ज कराने का फैसला किया है। तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने कहा कि वे 11 साल तक बेटी के इलाज के लिए बार-बार एम्स के चक्कर लगाते रहे। पैसे लेने के बावजूद मुझे और मेरी बेटी को सिर्फ बार-बार दौड़ाया गया। मेरी बेटी की मौत के जिम्मेदार दिल्ली एम्स है। मैं अपनी बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए अस्पताल प्रशासन के खिलाफ FIR दर्ज कराऊंगा।

एम्स ने जटिल बीमारी का हवाला दिया

वहीं एम्स दिल्ली ने मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया नामक बेहद जटिल जन्मजात बीमारी थी। एम्स के मुताबिक, 2017 में ही विशेषज्ञों के पैनल ने जांच के बाद पाया था कि दिल की जटिल बनावट की वजह से सर्जरी बेहद जोखिमभरी है। लिहाजा परिवार को दवाइयों के सहारे ही इलाज की सलाह दी गई थी। 1 सितंबर 2026 की तड़के 2:50 बजे तन्वी को अचानक अत्यधिक कमजोरी महसूस हुई और उसका ऑक्सीजन लेवल गिरकर 48% रह गया। डॉक्टरों ने लंबे समय तक उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

कमेटी इन बिंदुओं पर करेगी जांच

फिलहाल 15 वर्षीय बच्ची तन्वी की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। इलाज में लापरवाही के आरोपों के बीच AIIMS के निदेशक ने मामले की विस्तृत जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। यह कमेटी तन्वी के इलाज से जुड़े क्लिनिकल रिकॉर्ड, मेडिकल प्रोसेस, विशेषज्ञों की राय और मौत से जुड़ी परिस्थितियों की गहनता से समीक्षा करेगी। AIIMS के प्रवक्ता के अनुसार, गठित की गई जांच कमेटी निम्नलिखित बिंदुओं पर फोकस करेगी। साल 2012 से लेकर 2026 तक तन्वी के इलाज, ओपीडी विजिट और टेस्ट के पूरे रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। 2017 में डॉक्टरों द्वारा दिए गए उस निर्णय का मूल्यांकन होगा, जिसमें हार्ट की जटिल बनावट के चलते सर्जरी को नामुमकिन बताया गया था। क्या वाकई सर्जरी में देरी हुई या चिकित्सकीय दृष्टि से ऑपरेशन संभव ही नहीं था, इसका सच कमेटी सामने लाएगी।

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