कुंदन कुमार/ पटना। तेजस्वी यादव अपने बेटे इराज लालू यादव के पहले जन्मदिन के बहाने 27 मई को गाजियाबाद में एक बड़े राजनीतिक समागम की मेजबानी कर रहे हैं। इसकी तैयारी जोर-शोर से चालू है। इसमें 10 विपक्षी पार्टियों के बड़े नेताओं को आमंत्रित किया गया है। लालू परिवार रविवार को ही पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गया। इसे एक पारिवारिक कार्यक्रम बताया जा रहा है, लेकिन आमंत्रित अतिथियों की सूची- जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे दिग्गज शामिल हैं-यह स्पष्ट करती है कि इसके पीछे बड़े राजनीतिक मायने छिपे हैं।
विपक्षी एकजुटता का ‘डिनर डिप्लोमेसी’
दिल्ली के पास आयोजित यह भोज विपक्ष के लिए ‘राष्ट्रीय लामबंदी’ का केंद्र बन सकता है। लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी में होने वाला यह आयोजन आरजेडी और महागठबंधन के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। पटना में दही-चूड़ा और इफ्तार पार्टियों के न होने से खाली हुए राजनीतिक स्पेस को तेजस्वी इस आयोजन के जरिए भर रहे हैं, ताकि बीजेपी विरोधी ताकतों को एक मंच पर लाया जा सके।
महागठबंधन: सुलह और शक्ति का संतुलन
विधानसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन में दिखी आपसी खींचतान और सहयोगी दलों के बीच तालमेल की कमी ने तेजस्वी को सबक दिया है। आरजेडी अब उन पुरानी कड़वाहटों को मिटाने की कोशिश कर रही है। तेजस्वी का मानना है कि ममता बनर्जी के अनुभव और राहुल गांधी के नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाकर ही एक मजबूत विकल्प तैयार किया जा सकता है।
तेजस्वी का मास्टर प्लान: मिशन 2026-27
आरजेडी अपनी छवि बदलने और जनाधार बढ़ाने के लिए चार सूत्रीय फॉर्मूले पर काम कर रही है:
- आंतरिक सफाई: तेजस्वी पार्टी के भीतर ‘भीतरघात’ करने वालों की पहचान कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं की गोपनीय रिपोर्ट (CR) के आधार पर संगठन को दुरुस्त किया जा रहा है।
- MY से आगे ‘BAAP’: पार्टी अब सिर्फ मुस्लिम-यादव समीकरण तक सीमित नहीं है। अब ‘A to Z’ और ‘BAAP’ (बहुजन, अगड़ा, आधी आबादी और गरीब) के एजेंडे पर काम करते हुए अतिपिछड़ा (EBC) वोट बैंक को साधने पर जोर है।
- महिला वोट बैंक: राबड़ी देवी और अन्य महिला नेताओं को फ्रंट फुट पर लाकर नीतीश कुमार के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश जारी है।
- युवा और रोजगार: बेरोजगारी, पेपर लीक और महंगाई जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देकर तेजस्वी युवाओं को लामबंद करना चाहते हैं।
गाजियाबाद का यह भोज केवल एक जन्मदिन का जश्न नहीं, बल्कि तेजस्वी की उस नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत है, जहां वे केवल बिहार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी भूमिका को फौलादी बनाने के लिए संकल्पित हैं।

