हेमंत शर्मा, इंदौर। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के समीप स्थित बहुमूल्य शासकीय भूमि के कथित निजी हस्तांतरण और उसके संभावित व्यावसायिक उपयोग का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। इंदौर खंडपीठ में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन, राजस्व विभाग, कलेक्टर उज्जैन, नगर निगम सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह जनहित याचिका राजेंद्र कुवेल ने दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि महाकाल मंदिर के पास स्थित शासकीय भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में कथित रूप से निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया और बाद में उसका एक हिस्सा निजी कंपनी के नाम हस्तांतरित कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार ग्राम कस्बा उज्जैन के सर्वे नंबर 3664/1, 3666/1, 3690/1/1 और 3691/1, कुल करीब 1.877 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1950 के राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि बाद के वर्षों में बिना सक्षम आदेश के इस भूमि का नामांतरण निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया।याचिका में दावा किया गया है कि बाद में इस भूमि का एक हिस्सा Utopia Hotel and Resorts Private Limited के नाम हस्तांतरित किया गया, जिसके निदेशक आलोट विधायक चिंतामन मालवीय बताए गए हैं।
महाकाल आने वाले श्रद्धालुओं की पार्किंग पर खतरे का दावा
याचिका में कहा गया है कि विवादित भूमि का एक हिस्सा वर्तमान में हरि फाटक पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जहां महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन खड़े करते हैं।याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि इस भूमि का व्यावसायिक उपयोग या निर्माण कार्य शुरू हुआ तो पार्किंग व्यवस्था प्रभावित होगी और आगामी सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के यातायात और भीड़ प्रबंधन में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
हाईकोर्ट से क्या मांग की गई?
जनहित याचिका में मांग की गई है कि-संबंधित भूमि को दोबारा शासकीय भूमि के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण या विकास की अनुमति नहीं दी जाए।श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग व्यवस्था सुरक्षित रखी जाए।कथित नामांतरण और हस्तांतरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जाए।लंबित राजस्व प्रकरण का समयबद्ध निराकरण कराया जाए।
हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य शासन, राजस्व विभाग, संभागायुक्त उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, नगर निगम उज्जैन और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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