दिल्ली में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। यह फैसला लगातार मिल रही बम धमकियों और हाल ही में हुई एक गंभीर सुरक्षा चूक के बाद लिया गया। जानकारी के मुताबिक, विधानसभा सचिवालय और अध्यक्ष कार्यालय को पिछले कुछ दिनों में 6-7 धमकी भरे ईमेल मिले थे, जिनमें बम धमाके की आशंका जताई गई थी। इन धमकियों को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति की समीक्षा की।

दिल्ली में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की सुरक्षा अब Z श्रेणी में और कड़ी कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत उन्हें चौबीसों घंटे विशेष सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस सुरक्षा व्यवस्था में उनके विधानसभा कार्यालय से लेकर आवास तक हर जगह सुरक्षा घेरा मौजूद रहेगा। उनके काफिले के साथ हर समय एक एस्कॉर्ट गाड़ी भी चलेगी, जो मूवमेंट के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। आधिकारिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व एक वरिष्ठ अधिकारी करेगा। उसके साथ प्रशिक्षित कमांडोज की टीम तैनात रहेगी, जो हर परिस्थिति में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार रहेगी।

परिसर की सुरक्षा हो रही मजबूत

दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर विधानसभा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को बड़े स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। हालिया धमकियों और सुरक्षा चूक की घटनाओं के बाद यह कदम उठाया गया है, ताकि सभी विधायकों, कर्मचारियों और आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। नई व्यवस्था के तहत हर एंट्री गेट पर ऑटोमेटिक बूम बैरियर लगाए जा रहे हैं। इन बैरियर के जरिए आने-जाने वाले हर व्यक्ति और वाहन की सख्ती से जांच की जाएगी, जिससे बिना अनुमति किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके। इसके अलावा CRPF की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को वाहन सहित परिसर में तैनात किया गया है। यह टीम लगातार गश्त करेगी और किसी भी आपात स्थिति या खतरे से तुरंत निपटने के लिए तैयार रहेगी।

खतरे को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति

दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा चिंताओं के बीच विधानसभा सचिवालय ने साफ कर दिया है कि लोकतांत्रिक संस्थानों के खिलाफ किसी भी तरह के खतरे को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है। सचिवालय के अनुसार, विधायी प्रक्रिया की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है। हालिया घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ निगरानी भी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा और विधानसभा परिसर की अखंडता सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी के तहत नई सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं, ताकि सदन की कार्यवाही सुरक्षित और सुचारू रूप से जारी रह सके।

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