Dharm Desk – आजकल बहुत से दंपती यह महसूस करते हैं कि बिना किसी बड़ी वजह के भी रिश्तों में खटास बढ़ जाती है. छोटी-छोटी बातों पर बहस, बात-चीत में कमी और भावनात्मक दूरी जैसी स्थितियां आम हो गई हैं. बहुत बार कोशिश करने के बाद भी स्थिति सुधरती नहीं दिखती हैं. जिससे मन और अधिक उलझन में पड़ जाता है. ज्योतिष में ऐसी परिस्थितियों को ग्रहों की स्थिति से भी जोड़कर देखा जाता है खासकर जब बात प्रेम और आपसी सामंजस्य की हो तो जब संतुलन बिगड़ता है तो उसका सीधा असर रिश्तों पर पड़ता है.

ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह प्रेम, आकर्षण और भौतिक सुखों से जुड़ा होता है. जब इसकी स्थिति कमजोर होती है तो इसका असर सीधे रिश्तों की गुणवत्ता पर दिखाई देने लगता है. बातचीत में कटुता साथ ही एक-दूसरे को समझने में कमी और भावनात्मक जुड़ाव का कम होना इस बात का संकेत माना जाता है. ऐसी स्थिति में सभी लोग कई तरह के उपाय आजमाते हैं की रिश्तों में फिर से मिठास लाई जा सके. इनमें एक खास तरह का रत्न भी शामिल है, जिसे पहनने से शुक्र ग्रह से जुड़े क्षेत्रों में संतुलन लाने की कोशिश की जाती है. परन्तु इसका चयन और पहनने का तरीका सही होना जरूरी होता है.

इसे पहनने से होती है परेशानियां दूर

  1. सफेद पुखराज इसे शुक्र ग्रह से जुड़ा माना जाता है और चांदी या प्लैटिनम में जड़वाकर पहनना अच्छा माना जाता है. इसे शुक्रवार की सुबह के समय पहनना बेहतर माना जाता है.
  2. इस रत्न को पहनने के बाद दंपती के बीच संवाद में सुधार देखने को मिलता है. गलतफहमियां कम होने लगती हैं और एक-दूसरे के प्रति समझ विकसित होती है. इससे रिश्ते में अपनापन और स्थिरता बढ़ने लगती है, जो लंबे समय तक साथ निभाने के लिए जरूरी होती है. साथ ही आर्थिक और मानसिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिलता हैं.
  3. यह रत्न सिर्फ रिश्तों तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह जीवन के अन्य पहलुओं पर भी प्रभाव डालता है. करियर और आर्थिक मामलों में आने वाली रुकावटें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. साथ ही व्यक्ति की सोच पहले से ज्यादा सकारात्मक और संतुलित होती है. जिससे निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है.

सफेद पुखराज धारण करने की विधि

इस रत्न को पहनने से पहले गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध किया जाता है. इसके बाद इस मंत्र का जाप 108बार करते हुए इसे धारण किया जाता हैं.

ओम शुं शुक्राय नमः

हर कोई इस रत्न को नहीं पहन सकता

यह रत्न हर दंपति पर समान प्रभाव नहीं देता. इसलिए इसे पहनने से पहले कुंडली का विश्लेषण कराना जरूरी होता है. ताकि इसके अनुकूल या प्रतिकूल प्रभावों को समझा जा सके.