Dharm Desk – मई महीने में विवाह की तैयारियों में जुटे लोगों के लिए यह खबर बेहद अहम है. 17 मई से पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की शुरुआत होने जा रही हैं. जिसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा. ऐसे में जिन परिवारों ने अभी तक शादी की तारीख तय नहीं की है. उनके पास सीमित समय ही बचा है, ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन, कर्ण छेदन और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं.

मई माह में विवाह के शुभ मुहूर्त

हालांकि राहत की बात यह है कि अधिकमास शुरू होने से पहले मई में अब भी विवाह के कुछ शुभ मुहूर्त बाकी हैं. 5, 6, 7, 8, 13 और 14 मई को शादी के लिए अनुकूल तिथियां मानी गई हैं. इन तिथियों को मिलाकर कुल करीब 10 शुभ मुहूर्त उपलब्ध है. जिनमें विवाह संपन्न कराए जा सकते है. यही कारण है कि इन दिनों में शादी समारोहों की धूम देखने को मिल रही है.

अधिक मास में क्या करना चाहिए

अधिकमास को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है और इस दौरान पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में किए गए जप, तप और दान का कई गुना फल प्राप्त होता है.

  1. सुबह जल्दी उठकर भगवान विष्णु की पूजा, उनके बाल स्वरूप का अभिषेक और माखन-मिश्री का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. साथ ही तुलसी की सेवा, दीपदान और नियमित आराधना से विशेष पुण्य मिलता है.
  2. प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करना और शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी फल दायी बताया गया है.
  3. पवित्र नदियों में स्नान, पितरों के लिए दान और भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने की भी विशेष मान्यता है. धार्मिक ग्रंथों जैसे श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण और रामायण का पाठ या श्रवण इस मास में मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है.

क्यों पड़ता है अधिक मास

अधिकमास का कारण भी खगोलशास्त्र से जुड़ा है. हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि सौर वर्ष में थोड़ा अंतर होता हैं, इसी अंतर को संतुलित करने के लिए हर 2-3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. जिसे अधिक मास कहा जाता है. इस दौरान भले ही मांगलिक कार्य रुक जाते हों, लेकिन पूजा, दान और साधना के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना गया है.