प्रधानमंत्री आवास के पास हुए धरना-प्रदर्शन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी के व्यवहार को अशोभनीय और निंदनीय बताते हुए कहा कि विपक्ष के नेता के पद की गरिमा का उन्हें गंभीरता से पालन करना चाहिए।
‘असहमति और अराजकता में फर्क होता है’: नितिन नवीन
नितिन नवीन ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन असहमति और अराजकता दो अलग-अलग बातें हैं। जब लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सीमा पार हो जाती है, तो विरोध अराजकता में बदल जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का रवैया अब अराजकता की राजनीति का प्रतीक बनता जा रहा है।
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री का पद किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री देश के करोड़ों नागरिकों के निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश की जनता का भरोसा है और प्रधानमंत्री आवास के पास इस तरह का प्रदर्शन लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। नितिन नवीन ने आज की घटना को इतिहास का ‘काला दिन’ करार दिया।
धर्मेन्द्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया आई सामने
इस पूरे प्रदर्शन को लेकर देश के शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की भी पहली प्रतिक्रिया सामने आ गई है। उन्होंने कांग्रेस पर छात्रों के आंदोलन का राजनीतिकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, NEET मुद्दे पर सरकार चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि, धरना प्रदर्शन सुरक्षा नियमों के खिलाफ है।
प्रियंका गांधी ने की धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
वहीं, दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने छात्रों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज सुनना लोकतंत्र की जिम्मेदारी है। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया और एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सभी को है। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि वह इन मुद्दों पर संसद में चर्चा चाहती हैं, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है।
अखिलेश यादव बोले- छात्रों के साथ हुआ अन्याय
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार पर हमला बोला। हिरासत से रिहा होने के बाद उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें चोटें आईं।
अखिलेश यादव ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस पूरे मुद्दे को संसद में उठाएगा।
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