संजय विश्वकर्मा, उमरिया। टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश के सबसे अधिक बाघों वाले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ-मानव संघर्ष चिंता का विषय बनता जा रहा है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच यहां 9 बाघों की मौत हुई है, जबकि बाघों के हमलों में 7 लोगों की जान भी गई है। पिछली बाघ गणना में बांधवगढ़ में 165 बाघ दर्ज किए गए थे और अगली गणना में यह संख्या 200 के पार पहुंचने का अनुमान है।

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फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय के अनुसार अधिकांश बाघों की मौत आपसी संघर्ष, एक कुएं में गिरने और प्राकृतिक कारणों से हुई है। शिकार का कोई मामला सामने नहीं आया। उन्होंने बताया कि कोर के 10 और बफर क्षेत्र के 120 से अधिक गांवों के लोग जंगल पर निर्भर हैं, जिससे बाघ-मानव संघर्ष की घटनाएं बढ़ती हैं। प्रबंधन लगातार मॉनिटरिंग, ग्रासलैंड विकास, लैंटाना हटाने और गांवों के विस्थापन पर काम कर रहा है।

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वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ यश कुमार सोनी और एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि बढ़ती बाघ संख्या के अनुरूप टाइगर कॉरिडोर, ग्रासलैंड विस्तार, गांवों में जनजागरूकता और जिला प्रशासन के समन्वय से ही इस संघर्ष को कम किया जा सकता है। विश्व बाघ दिवस पर संरक्षण की उपलब्धियों के साथ बढ़ती चुनौतियों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत भी सामने आई है।

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