Dharm Desk – ज्येष्ठ अधिकमास के पावन अवसर पर आज 28 मई गुरु प्रदोष व्रत पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है, इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है खास बात यह है कि अधिकमास में पड़ने के कारण इस बार का गुरु प्रदोष व्रत और भी अधिक फल देने वाला हो गया है. ज्योतिष दृष्टि से भी यह व्रत कुंडली के गुरु ग्रह से जुड़े दोषों को शांत करने में सहायक बताया गया है.

आज के दिन प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त

श्रद्धालुओं को शिव पूजा के लिए कुल 2 घंटे 02 मिनट का विशेष समय मिल रहा है. जो शाम 07:12 बजे से रात 09:15 बजे तक रहेगा. इस दौरान भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला है. मान्यता है कि इस काल में की गई पूजा सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है.

क्या है प्रदोष व्रत का महत्व?

प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो दिन और रात के संधि काल यानी सूर्यास्त के बाद के समय में आता है. जब यह व्रत गुरुवार को पड़ता है तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है. गुरुवार का संबंध गुरु ग्रह से होता है जो ज्ञान, धर्म और भाग्य का प्रतीक है. ऐसे में इस दिन किया व्रत विशेष रूप से फल दायी माना जाता है.

ऐसे करें गुरु प्रदोष व्रत की पूजा

शिव भक्त स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूरे दिन संयम का पालन करें. संध्या समय गोधूली बेला में घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं. इसके बाद शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का अभिषेक करें. पूजा में कच्चा दूध, गंगाजल, बेलपत्र, सफेद चंदन, अक्षत और कनेर के पुष्प अर्पित करें. शिव परिवार की विधिवत पूजा-अर्चना करें और प्रदोष व्रत की कथा सुनें.

मंत्र और आरती का विशेष महत्व

पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना है. अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें. क्षमा प्रार्थना के साथ व्रत का समापन करें. श्रद्धा और विधि से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है.