रायपुर। राजधानी रायपुर के अनुपम नगर में करीब 40 वर्ष पुराने करंज के पेड़ के गिरने की घटना ने शहर में पेड़ों के आसपास किए जा रहे कंक्रीटीकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि अगस्त 2025 में फुटपाथ निर्माण के दौरान पेड़ के तने से सटाकर कंक्रीटीकरण किया गया था। करीब एक साल बाद अगस्त 2026 में उसी स्थान पर पेड़ जमीन से उखड़ा हुआ नजर आया। घटना की तस्वीरों के आधार पर रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने गंभीर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि क्या हमारे नगरीय निकाय जेन जी, जेन अल्फा और जेन बीटा के भविष्य को लेकर गंभीर हैं? साथ ही वृक्ष संरक्षण को लेकर जारी सरकारी निर्देशों का कितना पालन हो रहा है, यह सवाल भी किया है।

नितिन सिंघवी ने अगस्त 2025 की तस्वीर साझा कर बताया कि जब अनुपम नगर में सड़क के फुटपाथ पर कंक्रीटीकरण का कार्य किया गया था, इस दौरान वहां मौजूद पेड़ों के तनों से सटाकर कंक्रीटीकरण किया गया। एक स्थान पर करीब 40 वर्ष पुराने करंज के पेड़ के तने से भी सटाकर कंक्रीटीकरण कर दिया गया। इससे पेड़ के आसपास की खुली मिट्टी और प्राकृतिक जल-प्रवेश क्षेत्र समाप्त हो गया। अगस्त 2026 की तस्वीर में, यानी करीब एक वर्ष बाद, उसी स्थान का वही 40 वर्ष पुराना करंज का पेड़ जमीन से उखड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। दोनों तस्वीरों के बीच का यह मात्र एक वर्ष का अंतर पेड़ों के आसपास किए जा रहे कंक्रीटीकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या होता है कंक्रीटीकरण और पेवर लगाने से?

कंक्रीट और पेवर से पेड़ के आसपास की खुली मिट्टी ढक जाने से वर्षाजल का मिट्टी में प्रवेश कम हो जाता है। इससे मिट्टी में जड़ों के लिए आवश्यक पानी और ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। पेड़ कुछ समय तक बाहर से स्वस्थ दिखाई दे सकता है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी जड़ें कमजोर हो सकती हैं और अंततः उसके सूखने या तेज हवा में गिरने का खतरा बढ़ सकता है। अनुपम नगर का यह पेड़ तब गिरा, जब हवा भी तेज नहीं थी।

प्रतिबंध के बावजूद वर्षों से पेड़ों के चारों ओर कंक्रीटीकरण और पेवर

नितिन सिंघवी ने बताया कि वर्ष 2019 में ही पेड़ों के चारों ओर कंक्रीटीकरण और पेवर लगाने की समस्या पर उन्होंने शासन का ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद 21 नवंबर 2019 को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिए गए थे कि पेड़ों के चारों ओर लगभग एक मीटर क्षेत्र में किए गए कंक्रीट/पेवर को हटाया जाए और भविष्य में पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट/पेवर, सुधार कार्य या निर्माण कार्य एक मीटर तक न किया जाए।

वर्ष 2025 में ऑक्सीजोन रायपुर में पेड़ों के चारों तरफ पांच फीट की दीवार बनाने की शिकायत भी की गई थी। इसके बावजूद पेड़ों के आसपास कंक्रीट/पेवर का काम जारी रहने का आरोप है। इसका एक दूसरा गंभीर नुकसान यह है कि इससे वर्षाजल का जमीन में प्रवेश कम होता है, जिससे ग्राउंड वाटर रिचार्ज की समस्या भी बढ़ती है। सिंघवी ने सवाल उठाया कि जब शासन की ओर से प्रतिबंध लागू कर दिया गया था, तो इसके बावजूद कंक्रीटीकरण क्यों किया गया?

यूरोप हटा रहा है कंक्रीट और पेवर

सिंघवी ने कहा कि यह केवल रायपुर की समस्या नहीं है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के दौर में बड़े और पुराने वृक्ष शहरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे छाया देते हैं, तापमान कम करने में मदद करते हैं, कार्बन अवशोषित करते हैं और शहरों को रहने योग्य बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि जो लोग दिन में आठ घंटे विकास के बारे में सोचते हैं और रात में आठ घंटे विकास के सपने देखते हैं, उन्हें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई भी विकास विनाश की कीमत पर नहीं होना चाहिए। यदि विकास के नाम पर शहर के पुराने और बड़े वृक्षों को ही कमजोर कर दिया गया या उन्हें नष्ट कर दिया गया, तो आने वाले समय में इसकी कीमत रायपुर की जनता को चुकानी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही का खामियाजा रायपुर की जनता को बहुत दूर भविष्य में नहीं, बल्कि अगले वर्ष 2027 से ही महसूस हो सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान, कम होती छाया और बढ़ते अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट के बीच पुराने वृक्षों का नुकसान सीधे शहर के पर्यावरण और नागरिकों के जीवन को प्रभावित करेगा। यूरोप जो अभी जलवायु संकट की अभी तक की सबसे बड़ी मार झेल रहा है, वहां के कई निकाय Urban Heat Island Effect की मार कम करने के लिए और पेड़ों को बचाने के लिए कंक्रीट और पेवर हटा रहे है।

सिंघवी ने कहा, “मेरी इस बात को केवल एक अपील नहीं, बल्कि चेतावनी समझा जाए। विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास जो पेड़ों और पर्यावरण की कीमत पर हो, वह विकास नहीं बल्कि विनाश है।”

मुख्य सचिव को लिखा पत्र

सिंघवी ने इस मुद्दे पर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि सभी नगरीय निकायों में पेड़ों के चारों ओर किए गए कंक्रीटीकरण और पेवर को तत्काल पेड़ की प्रजाति और जरूरतके अनुरूप एक से तीन मीटर तक हटाया जाए। साथ ही भविष्य में पेड़ों की जड़ों के आसपास किसी भी प्रकार का कंक्रीट या पेवर का अभेद्य निर्माण न किया जाए।

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