G-7 देशों के साथ मीटिंग के बाद अमेरिका की तैयारी जी-2 समिट की है. G2 कोई औपचारिक संगठन नहीं है जैसे कि G7 या G20 है. पेरिस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब जी-2 की मीटिंग होगी, इसके बाद हम जी-20 देशों के साथ बैठक करेंगे.

अमेरिका और चीन को जी-2 देश कहा जाता है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर न तो इसका कोई दस्तावेज है और न ही इस समूह के पास कोई अपना दफ्तर है.

G2 अमेरिका और चीन के बीच एक अनौपचारिक और रणनीतिक अवधारणा है, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाती है. अमेरिका और चीन की यह बढ़ती करीबी (G2) भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी मायने रखती है. जी-2 की बैठक आखिरी बार दक्षिण कोरिया में हुई थी.

अगर आधिकारिक तौर पर बात किया जाए तो G-2 समूह का कोई अस्तित्व नहीं है. कूटनीतिक की दुनिया में अमेरिका और चीन के बीच की बैठक को जी-2 देशों की बैठक कहा जाता है. इस साल मई महीने के मध्य में डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग गए थे, लेकिन इस मीटिंग का नाम जी-2 नहीं दिया गया.

जानकारी के अनुसार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर 2026 में वाशिंगटन, डी.सी. जाने वाले हैं. माना जा रहा है कि अमेरिका इस बैठक को जी-2 नाम दे सकता है.

दक्षिण एशिया में चीन और भारत को प्रतिद्वंद्वी देश भी माना जाता है. चीन और अमेरिका के रिश्ते ठीक नहीं रहने के कारण इसका फायदा भारत को मिलता रहा है. अब अगर चीन के साथ अमेरिका जी-2 की मीटिंग करता है तो इसका असर भारत पर भी देखने को पड़ सकता है.

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