देहरादून. पूर्व सीएम हरीश रावत का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस या किसी को भी ED प्रकरण में बचाव की मुद्रा में आने की आवश्यकता ही नहीं है. हम तो आमंत्रण की मुद्रा में हैं और मैं तो आमंत्रण देकर कह रहा हूं कि जो भी भाई साहब हों, ईडी भाई साहब हों या कोई भाई साहब हों, आइए. मेरे 3 साल के कार्यकाल में जो भी नियुक्तियां हुई हैं, उन सबकी जांच करिए. 42,000 से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां की हैं, जहां पहुंचने में 10 साल से कई सरकारें, कई मुख्यमंत्री हांफ रहे हैं. जांच करिए ना!

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उन्होंने ये भी कहा कि आपदा के समय में पुनर्निर्माण और पुनर्वास की भी जांच करिए ना और चाहो तो स्टिंग की भी जांच करो सरकार बचाने या गिराने की, जिस रूप में भी देखना चाहो, उसकी भी जांच करो और कमीशन बनाकर के करो ना. संयुक्त (जॉइंट) कमीशन सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज का बनाओ और हरीश रावत के कार्यकाल की जांच करो.

हरीश रावत ने ये कहा कि किसी के ऊपर कोई दबाव न हो, किसी को बचाव की मुद्रा में न आना पड़े, इसीलिए मैंने जो दायित्व मेरे पास हैं, उनसे त्यागपत्र देने की बात कही है और मैं केवल सामान्य हरीश रावत के रूप में इस स्थिति का मुकाबला करना चाहता हूं. संविधान व कानून में कोई व्यवस्था नहीं है, नहीं तो जिन संवैधानिक पदों में मैं रहा, संविधान की शपथ लेकर के, मैं उन पदों की टाइटल को भी छोड़ देता. कहता, यह टाइटल भी मुझसे हटा दी जाए. लेकिन वह व्यावहारिक नहीं है.

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हरीश रावत ने ये भी कहा कि मगर मैं चाहता हूं, मुझे उत्तराखंड के एक सामान्य नागरिक के तौर पर ट्रीट किया जाए और मेरे कार्यकाल की जांच की जाए नियुक्तियों से लेकर के सब बातों की जांच की जाए और उसमें जो अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में मैंने नियुक्तियां की हैं, उसकी भी जांच की जाए. इसलिए मैं कुछ अपने दोस्तों को, जिनको भारी मन से कलमें घसीटनी पड़ती हैं, उनसे कहना चाह रहा हूं कि मेरे मामले में किसी को बचाव की नहीं, बल्कि आमंत्रण की मुद्रा में होना चाहिए और जो पुकार मैंने लगाई है कि कमीशन बनाओ, मेरे कार्यकाल की जाँच करो, उस पुकार को और गुंजायमान करना चाहिए.