MP : मध्य प्रदेश में बीते दो दिनों से बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है। कई जिलों में ओले गिरने से फसलों को नुकसान हुआ है। बेमौसम बारिश किसानों के लिए काली त्रासदी से कम नहीं रही। अचानक बदले मौसम के मिजाज ने देखते ही देखते तबाही का मंजर पैदा कर दिया। तेज गर्जना और कड़कती बिजली के साथ गिरे पानी और भीषण ओलावृष्टि ने प्रदेश के कई गांवों में पकी-पकाई फसलों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया है।
कुरवाई में आसमान से बरसी ‘सफेद आफत’
आकाश तिवारी, कुरवाई(विदिशा)। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे आसमान में काले बादलों का डेरा जमा और तेज हवाओं के साथ ओले गिरना शुरू हुए। सीहोरा, ककरुआ, लेटनी, पीकलोन, गुदावल और गंभीरिया सहित आसपास के गांवों में ओलों का आकार इतना बड़ा था कि कुछ ही मिनटों में खेतों से लेकर सड़कों तक बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। प्रकृति के इस उग्र रूप ने किसानों के साल भर के अरमानों को चकनाचूर कर दिया है।
खेतों में बिछ गई ‘सोने’ जैसी फसल
वर्तमान में खेतों में गेहूं, चना और सरसों की फसलें पूरी तरह पककर तैयार थीं। कई जगह कटाई का काम शुरू हो चुका था, लेकिन इस बेमौसम मार ने ओलों की चोट से गेहूं की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गईं। चने और सरसों का नुकसान: चने के झाड़ उखड़ गए और सरसों की फलियां झड़ जाने से दाना पूरी तरह बर्बाद हो गया। खड़ी फसलें आड़ी गिरने और पानी में डूबने से अब उनके काले पड़ने का डर सता रहा है।

धार में गेहूं की खड़ी फसलें खराब होने की आशंका
रेणु अग्रवाल, धार। जिले के आसपास के ग्रामीण अंचलों में गुरुवार को शाम होते-होते मौसम ने अचानक रुख बदल लिया। दिनभर की गर्मी के बाद तेज हवा चलने लगी और देखते ही देखते आसमान में बादल छा गए। इसके बाद कई इलाकों में तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। इस वक्त गेहूं की फसल के कटाई का दौर जारी है। कई खेतों में अभी भी गेहूं की फसल खड़ी है और इस बे मौसम बारिश से खड़ी फसल को नुकसान होने की आशंका है। वहीं मौसम में ठंडक घुल गई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मौसम का यह बदलाव अचानक हुआ और कुछ ही समय में पूरी तरह बदल गया।

बैतूल में भी बिगड़ा मौसम, फसलें तबाह
अमित पवार, बैतूल। जिले में देर रात एक बार फिर मौसम ने करवट ली और आंधी तूफान, गरज चमक के साथ में जमकर बारिश हुई। मौसम ने अचानक करवट ली और देखते ही देखते कई इलाके में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई।
बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी गेहूं और चने की फसलों को बुरी तरह तबाह कर दिया है। किसान इस समय कटाई में जुटे थे लेकिन ओलों की मार ने उनकी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया। खेतों में तैयार फसलें जमीन पर बिछ गई हैं, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग ने भी अगले 1 से 2 दिन तक ऐसे ही हालात बने रहने की चेतावनी दी है। जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। फिलहाल सवाल यही क्या प्रकृति की मार से किसान उबर पाएंगे।

बड़वानी में किसानों को भारी नुकसान, कई एकड़ फसल बर्बाद
समीर शेख, बड़वानी। जिले के पानसेमल क्षेत्र में आई आंधी-तूफान और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम के कारण खड़ी फसलें जमीन पर गिर गईं, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ग्राम टीमली के किसान विट्ठल संतोष पवार की लगभग 5 एकड़ मक्का की फसल पूरी तरह गिरकर नष्ट हो गई। वहीं ग्राम मल्फा निवासी पंडित जी गवले की करीब 8 एकड़ मक्का की फसल भी तेज हवा और तूफान की चपेट में आकर बर्बाद हो गई।
इस प्राकृतिक आपदा से दोनों किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि फसल पकने के समय इस तरह का नुकसान होना उनके लिए बहुत बड़ा झटका है और सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया। क्षेत्र के अन्य किसानों में भी चिंता का माहौल है, क्योंकि कई जगहों पर फसलें प्रभावित हुई हैं। प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का सर्वे कर जल्द से जल्द प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।

सिंगरौली में खुले में रखी गई करोड़ों की धान
सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। एक ओर जहां मौसम विभाग ने प्रदेश में बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई इलाको में मौसम खराब और बरसात हो रही है। वहीं सिंगरौली जिले में एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिल रही है। जहां किसानों से खरीदी गई करोड़ों रुपए की धान को खुले आसमान के नीचे रखा गया है। इसे सुरक्षित रखने के लिए विभाग के पास एक त्रिपाल तक नहीं है। अगर बारिश हुई तो खुले में रखी यह धान पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी और करोड़ों रुपए का सरकारी नुकसान होगा। बावजूद इसके प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।


