लखनऊ. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला है. उन्होंने कहा, संविधान का प्रावधान लागू करवाने के लिए अगर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पडे़ तो समझ लेना चाहिए सरकार पक्षपाती है. जो पक्षपाती होता है वह विश्वासघाती भी होता है. पक्षपात अपने आप में अन्याय है. पक्षपात हक और अधिकार मारता है. आरक्षण ही संरक्षक है. आरक्षण समानता का उपाय भी है और उपकरण भी हैं, अगर भाजपा सरकार को बुलडोजर का प्रयोग करना है तो गैर बराबरी की ऊंची-नीची जमीन को समतल करे. वंचितों को उनके हक का आरक्षण दें.
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आगे अखिलेश यादव ने कहा, सवाल यह है कि आरक्षण को नकारने की वजह क्या है? उन्होंने कहा कि दरअसल पांच हजार सालों के इतिहास में दो बड़े विभाजन रहे हैं. एक तरफ वर्चस्ववादी लोग रहे हैं. दूसरी तरफ वंचित लोग थे. इनका अनुपात 5 फीसदी बनाम 95 फीसदी रहा है. बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने यह भेदभाव और दुःख झेला था, इसीलिए उन्होंने सदियों पुराने सामाजिक विभेद को खत्म करने और बराबरी लाने के लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की, जो 2014 तक सुचारू रूप से चली. 2014 में पक्षपात, छलावे और जुमले की सरकार आई, तब से अंडरग्राउंड लोग ओवर ग्राउण्ड होने लगे. आरक्षण को मारने का षड्यंत्र एकदम से मुखर हो गया. वंचित समाज को हारकर हताश होकर बैठाने का प्रयास किया.
आगे अखिलेश यादव ने कहा कि वर्चस्ववादी आरक्षण की खुली डकैती कर रहे है. वे साबित करना चाहते है कि अगर संविधान की आरक्षण की व्यवस्था सीधे नहीं खत्म कर सकते है तो दूसरे रास्ते से नकार सकते है, जिससे लगे कि जो संविधान शोषित वर्ग की ढाल है, उससे ज्यादा शक्तिशाली वर्चस्ववादी है. इसलिए इनकी मनमानी का विरोध न करो. ये आरक्षण मार रहे है. एनएफएस से वंचित वर्ग को नकार रहे हैं. लेटरल एंट्री से अपने लोगों को सेट कर रहे है, जिससे सब जगह इनके लोग हो जाए और आरक्षण की मांग करने वाले कमजोर हो जाए. भाजपा संवैधानिक आरक्षण का फाउल प्ले खेल रही है. भाजपा वह साम्राज्य है जो सदियों से चली आ रही गैरबराबरी की लड़ाई को बेईमानी से जीतना चाहती है.
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अखिलेश यादव ने कहा, ये रूल्स में भी बेईमानी कर रही है. निर्णय में भी बेईमानी कर रही है. इनकी कोशिश कोर्ट रूपी थर्ड एम्पायर को भी मैनेज करने की रहती है. भाजपा वंचित समाज को मौका नहीं देना चाहती है. आरक्षण की सीढ़ी को खंडित करना चाहती है, जिनके सहारे हमारे वंचित समाज के लोग सामाजिक सोपानों की सीढ़िया चढ़कर समाज को वर्टिकल की जगह होरिजेंटल बनाना चाहते है, जिससे कोई ऊपर नीचे न हो सबको धरातल मिल सके.
आगे उन्होंने कहा, आरक्षण ही सामाजिक और राजनैतिक प्रतिनिधित्व मजबूत करेगा और लोकतंत्र को बचाएगा. आरक्षण में ही सामूहिक लोकतंत्र के निर्णय हो पाएंगे, नहीं तो लोकतंत्र में कुछ लोग मुखौटा लगाकर केवल अपना ही स्वार्थ सिद्ध करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि आरक्षण से ही वंचित समाज के साथ हजारों साल से हो रहा अन्याय मिटेगा. अगर वंचित समाज का कोई व्यक्ति प्रोग्रेसिव डिसीजन लेता है, लैपटॉप बांटता है, एक्सप्रेस-वे बनाता है. डायल 100 शुरू कराता है और अन्य विश्वस्तरीय काम करता है तो उसका घर गंगाजल से धुलवाया जाता है. आरक्षण इसी वर्चस्ववादी तंग नजरिया को साफ करता है. आरक्षण भिक्षा नहीं अधिकार है. आरक्षण को न मानना संविधान का तिरस्कार है. आरक्षण पीडीए की आवाज है.

